झारखंड में ट्रेजरी लूट का सनसनीखेज घोटाला! हजारीबाग में 15.41 करोड़ गायब, तीन पुलिस सिपाही जेल में – सुरक्षा देने वाले ही निकले चोर
हजारीबाग ट्रेजरी से 15.41 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पुलिस लेखा शाखा के तीन सिपाहियों ने Temp Pay ID बनाकर फर्जी वेतन बिल पास किए. तीनों आरोपी गिरफ्तार, 21 बैंक खाते फ्रीज. बोकारो घोटाले के बाद झारखंड में दूसरा बड़ा स्कैम, पूरे राज्य में हड़कंप.

Hazaribag: झारखंड के सरकारी खजाने में एक बार फिर भारी लूट का खुलासा हुआ है. बोकारो ट्रेजरी घोटाले के महज दो दिन बाद हजारीबाग जिला कोषागार से 15.41 करोड़ रुपये (15,41,41,485) की अवैध निकासी का मामला सामने आया है. पुलिस विभाग की लेखा शाखा में तैनात तीन सिपाहियों ने Temp Pay ID बनाकर वेतन-भत्ते के नाम पर फर्जी बिल पास किए और रकम संदिग्ध खातों में ट्रांसफर कर दी. तीनों ने गिरफ्तारी के बाद अपनी संलिप्तता कबूल ली और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने पुष्टि की कि वित्त विभाग के डेटा एनालिसिस से यह घोटाला 8 साल पुराना है. 21 बैंक खाते फ्रीज कर 1.60 करोड़ रुपये जब्त किए गए. बोकारो के बाद यह दूसरा बड़ा स्कैम है, जिसने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है. मुख्य सचिव ने सभी 33 ट्रेजरी की जांच का आदेश दे दिया. क्या यह सिर्फ निचले स्तर का फ्रॉड है या बड़े अधिकारियों की मिलीभगत? सवाल खड़े हो रहे हैं कि खजाने की सुरक्षा में तैनात पुलिस वाले ही लूट कैसे चला रहे थे?
शंभु कुमार है मास्टरमाइंड
हजारीबाग ट्रेजरी से फर्जी निकासी का मामला 8 अप्रैल को सामने आया. कोषागार पदाधिकारी ने लोहसिंगना थाने में FIR दर्ज कराई (केस नंबर 32/2026). अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल ने पाया कि पुलिस लेखा शाखा के सिपाही शंभु कुमार, रजनीश कुमार सिंह और धीरेंद्र कुमार सिंह ने Temp Pay ID बनाकर सेवानिवृत्त या गैर-मौजूद कर्मियों के नाम पर वेतन-भत्ता के फर्जी वाउचर तैयार किए. पूछताछ में तीनों ने जुर्म कबूल लिया. पुलिस ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. शंभु कुमार को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है.
करीब 11 साल तक चला खेल
जांच दल ने खुलासा किया कि आरोपी एक ही मोबाइल नंबर पर बिल क्लर्क और निकासी अधिकारी दोनों के OTP आते थे. तय वेतन से ज्यादा राशि निकाली गई. फर्जी दस्तावेजों से रकम अलग-अलग 21 बैंक खातों में भेजी गई. वित्त विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक यह खेल 8 से 11 साल तक चलता रहा. सिस्टम में Temp Pay ID का लूपहोल इस्तेमाल कर लाखों-करोड़ों की लूट आसान हो गई. 1.60 करोड़ रुपये अभी भी फ्रीज खातों में सुरक्षित हैं, लेकिन बाकी रकम कहां गई, इसकी तह तक पहुंचना बाकी है.
झारखंड में हड़कंप – राज्यव्यापी जांच
बोकारो में पहले 4.29 करोड़ का घोटाला पकड़ा गया, जिसमें पुलिस अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे गिरफ्तार हुए. उसके बाद मुख्य सचिव अविनाश कुमार के आदेश पर सभी जिलों की ट्रेजरी जांच शुरू हो गई. हजारीबाग में यह दूसरा बड़ा खुलासा है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा, “दो जिलों में इतनी बड़ी अनियमितता बर्दाश्त नहीं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात कर आगे की कार्रवाई होगी. जरूरत पड़ी तो अन्य एजेंसी से जांच कराई जाएगी.” अब सभी 33 ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी की जांच होगी.
क्या और घोटाले छिपे हैं?
प्रशासन ने तुरंत 21 खाते फ्रीज कर दिए और सभी डीडीओ को सख्त चेक एंड बैलेंस के निर्देश जारी किए. लेकिन सवाल यह है कि खजाने की सुरक्षा देने वाली पुलिस की लेखा शाखा में ही इतना बड़ा खेल कैसे चला? क्या यह सिर्फ तीन सिपाहियों का काम था या ऊपर तक सांठगांठ थी? वित्त विभाग अब PL अकाउंट की निकासी पर 15 दिन का नियम सख्ती से लागू कर रहा है. राज्य में सरकारी खजाने की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गए हैं. अगर यह सिलसिला जारी रहा तो विकास कार्यों के लिए आवंटित पैसा कहां जाएगा? सरकार को अब सिस्टम पूरी तरह बदलना होगा, वरना ऐसे घोटाले और बढ़ते जाएंगे.

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