सरना-सनातन विवाद: कांग्रेस के बयान के बाद बाबूलाल मरांडी का पलटवार, बोले- ‘सरना-सनातन एक हैं’
“बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर समाज को विभाजित करने का आरोप लगाया और कहा कि सरना और सनातन के बीच अंतर बताने की राजनीति झारखंड के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने का प्रयास है।”

झारखंड में आदिवासी पहचान, सरना धर्म कोड और धार्मिक अस्मिता को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस द्वारा सरना धर्म और हिंदू धर्म (सनातन) को अलग बताते हुए बीजेपी और आरएसएस पर आदिवासी समाज के मुद्दों पर दोहरी राजनीति का आरोप लगाने के बाद अब भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर समाज को विभाजित करने का आरोप लगाया और कहा कि सरना और सनातन के बीच अंतर बताने की राजनीति झारखंड के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने का प्रयास है।
कांग्रेस ने क्या कहा था?
प्रदेश कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलेश केशव महतो, पूर्व मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव, सांसद सुखदेव भगत, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और विधायक राजेश कश्यप मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि सरना धर्म और हिंदू धर्म अलग-अलग हैं और आदिवासी समुदाय मूल रूप से हिंदू नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस आदिवासी समाज के बीच पहचान को लेकर दोहरी राजनीति कर रहे हैं। साथ ही जनगणना में अलग सरना धर्म कोड की मांग को भी दोहराया गया।
बाबूलाल मरांडी का जवाब: ‘कांग्रेस अंग्रेजों वाली राजनीति कर रही’
कांग्रेस के आरोपों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता की शुरुआत से ही कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थापना अंग्रेजों के दौर में हुई और अंग्रेजों की नीति समाज को बांटकर शासन करने की थी। आज कांग्रेस उसी सोच पर काम कर रही है।
मरांडी ने कहा कि महात्मा गांधी भी कांग्रेस को समाप्त करना चाहते थे, लेकिन आज वही पार्टी समाज में विभाजन की राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह कह रही है कि बीजेपी और आरएसएस आदिवासियों को हिंदू बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
‘सरना और सनातन में कोई विरोध नहीं’, मरांडी का दावा
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरना और सनातन परंपरा में प्रकृति पूजा की अवधारणा समान है और दोनों के बीच विभाजन बताना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सरना और हिंदू परंपरा में कई सांस्कृतिक समानताएं मौजूद हैं।
मरांडी ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है।
हालांकि, यह विषय लंबे समय से बहस का हिस्सा रहा है और आदिवासी संगठनों तथा सरना धर्म कोड समर्थकों का एक वर्ग अलग धार्मिक पहचान की मांग करता रहा है।
धर्मांतरण, सरना भूमि और सरकार पर भी साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो सरकार पर धर्मांतरण के मुद्दे पर चुप रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में सरना और मसना स्थलों की जमीन प्रभावित हो रही है, लेकिन इस पर सरकार गंभीर नहीं दिखती।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार और उसके सहयोगी समाज को विभाजित करने वाली राजनीति कर रहे हैं, लेकिन ऐसी राजनीति लंबे समय तक नहीं टिकेगी।
आदिवासी पहचान का मुद्दा फिर बना राजनीतिक केंद्र
झारखंड में सरना धर्म कोड, आदिवासी पहचान और धार्मिक वर्गीकरण का सवाल लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। कांग्रेस के हालिया बयान और उसके जवाब में भाजपा की प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और तेज हो सकता है।
विशेषकर तब, जब आदिवासी अस्मिता और अलग धार्मिक पहचान के सवाल पर विभिन्न राजनीतिक दलों की राय एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।

