Video: ऑक्सफोर्ड ने बुलाया, लेकिन 6 लाख रुपये ने रोक दिया कदम! हजारीबाग के राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती
“हजारीबाग के राहुल कुमार का चयन केमिस्ट्री में पीएचडी के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में 100% फेलोशिप के साथ हुआ है. हालांकि, वीजा, IHS, हवाई टिकट और अन्य शुरुआती खर्चों के लिए करीब 6 लाख रुपये की जरूरत है. आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने सरकार और समाज से मदद की अपील की है.”

Hazaribag: दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों में शुमार ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलना लाखों छात्रों का सपना होता है. झारखंड के हजारीबाग जिले के ईचाक मोड़ निवासी राहुल कुमार ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर इस सपने को सच कर दिखाया. केमिस्ट्री में पीएचडी के लिए उनका चयन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुआ है और उन्हें 100 प्रतिशत फेलोशिप भी मिली है. यानी पढ़ाई, रिसर्च, रहने और खाने का पूरा खर्च विश्वविद्यालय उठाएगा. लेकिन विदेश जाने से पहले वीजा, इमिग्रेशन हेल्थ सरचार्ज (IHS), हवाई टिकट और अन्य जरूरी औपचारिकताओं पर आने वाला करीब छह लाख रुपये का खर्च उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. सब्जी बेचकर परिवार चलाने वाले पिता के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना आसान नहीं है. राहुल का कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में रिसर्च करने का उनका सपना अधूरा रह सकता है.
संघर्ष से मिली ऑक्सफोर्ड की मंजिल
राहुल कुमार की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है. आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने वाले राहुल ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु से केमिस्ट्री में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. इस संस्थान में प्रवेश के दौरान उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 30 हासिल की थी. अब उनका चयन दुनिया की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए हुआ है, जहां वह केमिस्ट्री के क्षेत्र में शोध करेंगे. यह उपलब्धि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है.
फेलोशिप मिली, लेकिन सफर का खर्च नहीं
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने राहुल को 100 प्रतिशत फेलोशिप दी है. इसके तहत ट्यूशन फीस, रिसर्च, रहने और खाने का पूरा खर्च विश्वविद्यालय उठाएगा. लेकिन यूनाइटेड किंगडम जाने से पहले वीजा, इमिग्रेशन हेल्थ सरचार्ज (IHS), हवाई टिकट और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं का खर्च उन्हें स्वयं वहन करना होगा. राहुल के अनुसार, अकेले IHS पर ही करीब साढ़े चार लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. वीजा और हवाई टिकट समेत अन्य खर्च जोड़ने पर कुल राशि लगभग छह लाख रुपये तक पहुंच जाती है.
पिता बेचते हैं सब्जी, राहुल पढ़ाकर चलाते हैं अपना खर्च
राहुल का परिवार हजारीबाग के ईचाक मोड़ में रहता है. उनके पिता सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद राहुल ने पढ़ाई जारी रखी. वर्तमान में वह हजारीबाग के इंटर साइंस कॉलेज में पढ़ाकर अपना खर्च स्वयं निकालते हैं. परिवार ने हर संभव कोशिश की, लेकिन विदेश जाने के लिए जरूरी लाखों रुपये जुटाना अब उनके लिए मुश्किल हो गया है.
योजना में है छात्रवृत्ति, लेकिन उठ रहे हैं सवाल
राहुल ने आर्थिक सहायता के लिए राज्य सरकार से भी गुहार लगाई है. झारखंड सरकार विदेश में उच्च शिक्षा और शोध के लिए मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना संचालित करती है. योजना के तहत चयनित छात्रों को ट्यूशन फीस के साथ जीवन-यापन के लिए प्रतिवर्ष आर्थिक सहायता दी जाती है. हालांकि उपलब्ध दिशा-निर्देशों में वीजा शुल्क, इमिग्रेशन हेल्थ सरचार्ज (IHS), हवाई टिकट और विदेश जाने के शुरुआती खर्चों का अलग से स्पष्ट उल्लेख नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र इन शुरुआती खर्चों का इंतजाम कैसे करेंगे. यदि छात्र विदेश तक ही नहीं पहुंच पाएगा, तो उसे मिलने वाली छात्रवृत्ति का लाभ भी अधूरा रह जाएगा.
सरकार और समाज से राहुल की उम्मीद
राहुल ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के सक्षम लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील की है. उनका कहना है कि समय रहते मदद मिल गई तो वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपना शोध कार्य शुरू कर सकेंगे. वहीं बवाल न्यूज भी सामाजिक संगठनों, एनजीओ, उद्योगपतियों, जनप्रतिनिधियों और सक्षम नागरिकों से अपील करता है कि राहुल जैसे मेधावी छात्र की मदद के लिए आगे आएं. एक गरीब परिवार का बेटा अपनी मेहनत के दम पर ऑक्सफोर्ड तक पहुंचा है. जरूरत सिर्फ इतनी है कि उसके सपनों और ऑक्सफोर्ड के बीच खड़ी आर्थिक बाधा को मिलकर दूर किया जाए, ताकि झारखंड का यह बेटा दुनिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में देश का नाम रोशन कर सके.

