RIMS में वेतन पर बवाल! 1500 कर्मचारियों का हंगामा, डायरेक्टर बोले- मेरी सैलरी भी रुकी
झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) में वेतन संकट को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. सोमवार को एक बार फिर डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और स्थायी कर्मचारियों सहित करीब 1500 कर्मचारियों ने तीसरी बार निदेशक कार्यालय का घेराव किया.

Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) में वेतन संकट को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. सोमवार को एक बार फिर डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और स्थायी कर्मचारियों सहित करीब 1500 कर्मचारियों ने तीसरी बार निदेशक कार्यालय का घेराव किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, जबकि पीजी फर्स्ट ईयर के जूनियर डॉक्टरों को करीब छह महीने से भुगतान का इंतजार है. वेतन न मिलने से कर्मचारियों में गहरी नाराजगी और आर्थिक संकट की स्थिति बन गई है. वहीं इस पूरे मामले पर रिम्स डायरेक्टर डॉ. राजकुमार ने स्वीकार किया कि तकनीकी कारणों और सॉफ्टवेयर सिस्टम की समस्या के चलते वेतन प्रक्रिया बाधित हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी अपनी तनख्वाह भी रुकी हुई है. प्रशासन ने जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है, लेकिन कर्मचारी आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं.
तीसरी बार निदेशक कार्यालय का घेराव
रिम्स में वेतन संकट को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. सोमवार को करीब 1500 स्थायी कर्मचारियों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों ने तीसरी बार रिम्स निदेशक कार्यालय का घेराव किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. वहीं पीजी फर्स्ट ईयर के जूनियर डॉक्टरों को लगभग छह महीने से भुगतान नहीं हुआ है, जिससे उनकी स्थिति और भी गंभीर हो गई है. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकजुट होकर नारेबाजी करते नजर आए. स्थिति को संभालने के लिए रिम्स निदेशक डॉ. राज कुमार स्वयं बाहर आए और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की. करीब तीन घंटे तक चले इस घेराव के बाद आश्वासन मिलने पर आंदोलन को फिलहाल समाप्त कर दिया गया, लेकिन कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
डायरेक्टर का बयान और तकनीकी वजह
रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने वेतन संकट पर सफाई देते हुए कहा कि यह समस्या किसी वित्तीय अनियमितता के कारण नहीं बल्कि तकनीकी वजहों से उत्पन्न हुई है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 से चल रही टेंपरेरी आईडी आधारित वेतन प्रणाली अब झारखंड सरकार के नए ट्रेजरी सॉफ्टवेयर के साथ समन्वय नहीं कर पा रही है. पुलिस विभाग में हुए एक बड़े घोटाले के बाद वित्त विभाग द्वारा नियमों में बदलाव किए गए, जिसके चलते नया सिस्टम रिम्स के कर्मचारियों की सैलरी प्रोसेस नहीं कर पा रहा है. इसके अलावा NPS कटौती और आईडी वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी जटिल हो गई है. डायरेक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें शुरुआत में वेतन रुकने की पूरी जानकारी नहीं थी और उनकी खुद की तनख्वाह भी प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के साथ बातचीत चल रही है और जल्द तकनीकी समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है.
कर्मचारियों का आंदोलन और आगे की चेतावनी
वेतन न मिलने से नाराज रिम्स कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और स्थायी कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन बार-बार आश्वासन दे रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है. कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले दो से चार दिनों में उनके खातों में वेतन नहीं आया तो वे अपना आंदोलन और उग्र करेंगे. दूसरी ओर, रिम्स प्रशासन का कहना है कि आईडी सत्यापन और सॉफ्टवेयर सुधार की प्रक्रिया तेजी से की जा रही है और जल्द ही लंबित वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा. इस पूरे मामले ने झारखंड के स्वास्थ्य तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में ही कर्मचारियों को महीनों तक वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है.

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