MLC से इस्तीफा, राज्यसभा शपथ और खरमास का सियासी इंतजार: नीतीश कुमार का स्मूथ सत्ता हस्तांतरण प्लान क्या है?
बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं. Nitish Kumar के राज्यसभा जाने और MLC पद छोड़ने के बाद खरमास खत्म होते ही नया मुख्यमंत्री मिल सकता है. NDA में Samrat Choudhary का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। सियासी हलचल चरम पर है.


Patna: बिहार की सियासत में एक युग का समापन और नये दौर की शुरुआत हो रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को अपनी 'समृद्धि यात्रा' का पांचवां और अंतिम चरण पूरा कर लिया. नालंदा और पटना में यात्रा समाप्त होने के साथ ही अब सबकी नजरें दिल्ली और आगामी सत्ता परिवर्तन पर टिकी हैं. 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित नीतीश को 30 मार्च तक विधान परिषद (MLC) से इस्तीफा देना पड़ेगा. इसके बाद अप्रैल के दूसरे हफ्ते में राज्यसभा शपथ. लेकिन असली मोड़ 14 अप्रैल के बाद आएगा – जब खरमास खत्म होगा और बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है.
NDA के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस बार BJP पहली बार बिहार की कमान संभालने जा रही है और डिप्टी CM सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. नीतीश का मकसद साफ है – सत्ता का ट्रांसफर बिना किसी तनाव या विवाद के, पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से पूरा करना. लगभग दो दशक तक राज्य की राजनीति पर छाए रहे अनुभवी नेता अब केंद्र में NDA की मजबूती पर ध्यान देंगे. घरेलू मोर्चे पर जदयू को संभालने की तैयारी भी चल रही है – बेटे निशांत कुमार की सक्रिय भूमिका, स्पीकर पद की दावेदारी और नई सरकार में जदयू की हिस्सेदारी. चर्चा है कि नीतीश 12-13 अप्रैल के आसपास शपथ लेकर उसके तुरंत बाद CM पद छोड़ सकते हैं. खरमास का पर्दा हटते ही बिहार की राजनीति नया रूप लेगी.
समृद्धि यात्रा का धमाकेदार फिनाले, अब फोकस दिल्ली पर
नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' का अंतिम चरण आज पटना-नालंदा में समाप्त हुआ. पूरे बिहार के 38 जिलों को छूने वाली इस यात्रा में विकास योजनाओं की समीक्षा, जनता से सीधा संवाद और भविष्य की दिशा तय करने का काम हुआ. यात्रा खत्म होते ही नीतीश अब सोमवार से पूरी तरह दिल्ली की तैयारी में जुट जाएंगे.
शुक्रवार को रामनवमी के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शनिवार से जदयू की अहम बैठकें शुरू होंगी. प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक के बाद कोर कमेटी में नई सरकार के स्वरूप, मंत्रियों की संख्या और जदयू की भूमिका पर चर्चा होगी. सूत्र बताते हैं कि नीतीश इस दौरान पार्टी संगठन को नई दिशा देने और भविष्य की रणनीति पर फोकस करेंगे. यात्रा के दौरान उन्होंने विकास कार्यों पर जोर दिया, जो अब केंद्र स्तर पर भी उनकी भूमिका में मददगार साबित होगा.
राज्यसभा शपथ का काउंटडाउन
कानूनी नियम बिल्कुल साफ है. राज्यसभा चुनाव जीतने के 14 दिनों के अंदर विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी. यानी 30 मार्च तक नीतीश MLC से इस्तीफा देंगे. राज्यसभा का नया कार्यकाल 10 अप्रैल के आसपास शुरू होने वाला है, इसलिए शपथ अप्रैल के पहले या दूसरे हफ्ते में हो सकती है.
MLC इस्तीफे का टाइम बंधा
कुछ जदयू नेताओं का कहना है कि MLC इस्तीफा देने के बाद भी वे छह महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि वे अप्रैल के दूसरे हफ्ते में ही CM पद से इस्तीफा दे देंगे. पूरा प्रोसेस दो चरणों में होगा – पहले MLC, फिर मुख्यमंत्री पद. खरमास (14 अप्रैल तक) की वजह से नई सरकार का गठन और शपथ बाद में होगा. नीतीश चाहते हैं कि सब कुछ बिना किसी विवाद के और पूरी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए हो.
जदयू की हाई लेवल बैठकें
शनिवार से जदयू की प्रदेश इकाई और कोर कमेटी की बैठकें शुरू होंगी. इनमें नई सरकार के फॉर्मूले, मंत्रियों की संख्या और जदयू की दावेदारियों पर गहन मंथन होगा. जदयू विधानसभा स्पीकर पद पर मजबूत दावा ठोक रही है.
निशांत की बढ़ती भूमिका और स्पीकर की दावेदारी
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता तेज हो गई है. उन्होंने हाल में जदयू कार्यालय पहुंचकर पदाधिकारियों, प्रवक्ताओं और युवा नेताओं से बैठकें कीं. पार्टी के अंदर चर्चा है कि निशांत को नई सरकार में उपमुख्यमंत्री या महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है, जिससे जदयू में नेतृत्व की निरंतरता बनी रहे. निशांत अभी पार्टी संगठन को मजबूत करने और जिलों में संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. बैठक में जदयू को कितने मंत्री और कौन से विभाग मिलेंगे, यह भी तय होगा.
खरमास बाद नया CM: सम्राट चौधरी का नाम सबसे हॉट
14 अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार बनने की प्रबल संभावना है. NDA के अंदर सहमति बन रही है कि इस बार BJP का नेता मुख्यमंत्री बनेगा. डिप्टी CM सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है. नीतीश कुमार भी उन्हें पसंद करते दिख रहे हैं. अन्य संभावित नामों में विजय सिन्हा आदि का जिक्र है, लेकिन सम्राट पर सबसे ज्यादा दांव लग रहे हैं.
चिराग पासवान ने साफ संकेत दिया है कि वे CM रेस में नहीं हैं और BJP का नेता ही मुख्यमंत्री होना चाहिए. नई सरकार में जदयू और BJP की मंत्रियों की संख्या में बदलाव हो सकता है. नीतीश का पूरा स्ट्रैटेजी सत्ता हस्तांतरण को सुचारू रखना, केंद्र में अपनी नई भूमिका निभाना और जदयू को आने वाले समय के लिए तैयार करना है. बिहार की जनता अब 15 अप्रैल के आसपास नई शुरुआत की उम्मीद कर रही है. राजनीतिक मैदान में बदलाव तो आ रहा है, लेकिन विकास की रफ्तार बनी रहे – यही आम अपेक्षा है.

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