तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट पास, मुख्यमंत्री विजय को 144 वोटों से मिली बड़ी जीत
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में 144 वोट हासिल कर अपनी सरकार का बहुमत साबित कर दिया है. टीवीके को सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद छोटे दलों और विपक्षी विधायकों के समर्थन से यह जीत मिली.

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में 144 वोट हासिल कर अपनी सरकार का बहुमत साबित कर दिया है. यह उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पहला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान था, जिसमें उन्होंने आसानी से जीत दर्ज की. उनकी पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्त्री कजगम) भले ही बहुमत से थोड़ा पीछे रही, लेकिन छोटे दलों और कुछ विपक्षी विधायकों के समर्थन ने सरकार को मजबूती दी. फ्लोर टेस्ट के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं. कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन के बीच यह विश्वास मत कई राजनीतिक संदेश भी छोड़ गया है.
फ्लोर टेस्ट में 144 वोटों से जीत
तमिलनाडु विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान मुख्यमंत्री विजय को 144 विधायकों का समर्थन मिला. यह संख्या सरकार को स्पष्ट बहुमत के ऊपर ले गई और विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली. मतदान प्रक्रिया के दौरान विभिन्न दलों के विधायकों ने हिस्सा लिया, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक दिलचस्प हो गया. यह फ्लोर टेस्ट विजय सरकार के लिए एक अहम परीक्षा माना जा रहा था, जिसमें वे सफल रहे.
छोटे दलों और अंदरूनी टूट से मिला समर्थन
टीवीके पार्टी को विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद पूर्ण बहुमत नहीं मिला था. लेकिन फ्लोर टेस्ट के दौरान छोटे दलों और कुछ अन्य पार्टियों के विधायकों के समर्थन ने सरकार को मजबूती दी. एआईएडीएमके के भीतर मतभेद भी सामने आए, जिससे कुछ विधायकों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया. इसी राजनीतिक टूट-फूट ने विजय सरकार के पक्ष में माहौल बना दिया.
कांग्रेस और वाम दलों का समर्थन
फ्लोर टेस्ट के दौरान कांग्रेस और माकपा ने सरकार को समर्थन देने की घोषणा की, जिससे सत्ता पक्ष की स्थिति और मजबूत हो गई. वहीं कुछ दलों ने मतदान से दूरी बनाए रखी, जिससे विपक्ष पूरी तरह एकजुट नहीं दिखा. इस समर्थन ने विजय सरकार को एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया और उनकी स्थिति को स्थिरता प्रदान की.
एआईएडीएमके में विवाद और आगे की राजनीति
फ्लोर टेस्ट के दौरान एआईएडीएमके के भीतर भी गहरे मतभेद सामने आए. पार्टी का एक हिस्सा सरकार के समर्थन में नजर आया, जबकि नेतृत्व ने विरोध का रुख अपनाया. इस विभाजन ने विधानसभा की राजनीतिक तस्वीर को बदल दिया. अब माना जा रहा है कि आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जहां गठबंधन और टूट दोनों की अहम भूमिका रहेगी.

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