Video: झारखंड BJP में बढ़ी बेचैनी! सड़क पर उतरे दिग्गज, क्या शुरू हो चुका है ‘पॉलिटिकल सर्वाइवल गेम’?
“झारखंड बीजेपी में अचानक सड़क वाली राजनीति तेज हो गई है. बाबूलाल मरांडी से लेकर अर्जुन मुंडा और रघुवर दास तक बड़े नेता अब धरना-प्रदर्शन में सक्रिय दिख रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी में “जो दिखेगा वही टिकेगा” वाला फॉर्मूला लागू हो चुका है?”

झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है. बीजेपी अब सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट और चिट्ठी राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती. पार्टी अब सड़क पर उतरकर आक्रामक राजनीति का संदेश देने में जुट गई है. रांची समाहरणालय के बाहर हुआ “मटका फोड़” प्रदर्शन सिर्फ पानी-बिजली संकट के खिलाफ विरोध नहीं था, बल्कि इसे झारखंड बीजेपी की आने वाली राजनीतिक रणनीति का ट्रेलर माना जा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि जो नेता लंबे समय से सिर्फ बयानबाजी तक सीमित दिख रहे थे, वही अब भीषण गर्मी में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं. धनबाद में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ढुल्लू महतो और रागिनी सिंह के साथ सड़क पर उतरे, जबकि रांची में अर्जुन मुंडा, संजय सेठ और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू कार्यकर्ताओं के बीच दिखाई दिए. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि बीजेपी अब अपने सभी बड़े चेहरों को फिर से मैदान में सक्रिय करने की कोशिश कर रही है.
“जो दिखेगा वही टिकेगा” वाला फॉर्मूला?
2024 विधानसभा चुनाव के बाद झारखंड बीजेपी में एक तरह का राजनीतिक सन्नाटा देखने को मिला था. अर्जुन मुंडा और रघुवर दास जैसे बड़े चेहरे, जो कभी झारखंड बीजेपी की राजनीति के केंद्र में हुआ करते थे, अचानक काफी शांत दिखाई देने लगे. सार्वजनिक आंदोलनों और जिला स्तर के कार्यक्रमों से उनकी दूरी साफ नजर आ रही थी.
लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलनों में सक्रिय हो रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अब झारखंड में “फील्ड पॉलिटिक्स” चाहता है. दिल्ली से साफ संदेश दिया गया है कि जो नेता जनता के बीच दिखेगा, वही आगे संगठन और राजनीति में जगह बनाए रख पाएगा.
बंगाल जीत के बाद झारखंड पर बढ़ा फोकस
बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है. यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, ओडिशा और बंगाल में मजबूत पकड़ के बाद अब झारखंड बीजेपी के लिए अगला बड़ा लक्ष्य माना जा रहा है. पार्टी यहां किसी तरह का राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहती.
यही वजह है कि अब बीजेपी झारखंड में सिर्फ सोशल मीडिया या बयानबाजी की राजनीति नहीं, बल्कि आक्रामक सड़क राजनीति पर फोकस करती दिख रही है. आदित्य साहू, संजय सेठ और दीपक प्रकाश जैसे नेताओं को लगातार एक्टिव मोड में रखा जा रहा है, जबकि पुराने दिग्गजों को भी जमीन पर उतरने का संकेत मिल चुका है.
अंदरूनी कलह दबाने की कोशिश?
धनबाद में मटका फोड़ प्रदर्शन के दौरान ढुल्लू महतो और रागिनी सिंह का एक मंच पर दिखना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. लंबे समय से दोनों नेताओं के रिश्तों में खटास की चर्चा होती रही है, लेकिन कार्यक्रम में दोनों साथ नजर आए.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी फिलहाल किसी भी तरह की अंदरूनी कलह का संदेश बाहर नहीं जाने देना चाहती. पार्टी जानती है कि अगर संगठन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए, तो उसका फायदा JMM को मिल सकता है. इसलिए फिलहाल सभी नेताओं को एक मंच पर लाकर “एकजुट बीजेपी” की तस्वीर पेश की जा रही है.
झारखंड बीजेपी में क्या आने वाला है बड़ा बदलाव?
बीजेपी अब अपराध, दुष्कर्म, शराब घोटाला, ट्रेजरी घोटाला और प्रिंस खान जैसे मुद्दों पर लगातार एक्टिव दिखाई दे रही है. बाबूलाल मरांडी और आदित्य साहू जैसे नेता सिर्फ बयान देने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि जनता के बीच जाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अर्जुन मुंडा और रघुवर दास जैसे पुराने दिग्गजों की बढ़ती सक्रियता सिर्फ आंदोलन तक सीमित है, या फिर झारखंड बीजेपी में बड़ा संगठनात्मक बदलाव होने वाला है? क्या पुराने नेताओं को आखिरी मौका दिया जा रहा है, या नए चेहरों के लिए जमीन तैयार की जा रही है?
एक बात फिलहाल साफ दिख रही है — झारखंड बीजेपी में अब आराम की राजनीति खत्म होती नजर आ रही है. आने वाले दिनों में वही नेता मजबूत स्थिति में होगा, जो सड़क पर सक्रिय दिखाई देगा.

