रजिस्ट्री पोर्टल बंद, धान खरीद आधी और किसानों को बाजार नहीं, विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरा
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. सदन में विधायकों को कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराने से जुड़ा रजिस्ट्री पोर्टल नहीं खुलने का मामला फिर उठा, जिस पर सरकार ने जल्द समाधान का भरोसा दिया.


Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. सदन में विधायकों को कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराने से जुड़ा रजिस्ट्री पोर्टल नहीं खुलने का मामला फिर उठा, जिस पर सरकार ने जल्द समाधान का भरोसा दिया. वहीं राज्य में धान खरीद की धीमी रफ्तार को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा और लक्ष्य पूरा होने पर सवाल खड़े किए. इसके अलावा किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित करने की मांग भी सदन में उठी. इन मुद्दों पर संबंधित मंत्रियों ने जवाब देते हुए कई कारण बताए और भविष्य में ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया. विधानसभा में उठे इन सवालों से साफ है कि जमीन, कृषि व्यवस्था और किसानों के हित जैसे मुद्दे राज्य की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं.
रजिस्ट्री पोर्टल नहीं खुलने पर फिर उठा सवाल
विधानसभा में विधायक नवीन जायसवाल ने कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से विधायकों को जमीन उपलब्ध कराने से जुड़े रजिस्ट्री पोर्टल का मुद्दा फिर उठाया. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा तीन दिन के भीतर पोर्टल शुरू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी पोर्टल नहीं खोला गया. इस पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि रांची के उपायुक्त से बातचीत में सामने आया है कि सोसाइटी की कुछ जमीनों पर अतिक्रमण हो गया है और कुछ जगहों पर बंदोबस्ती भी कर दी गई है. साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतें भी हैं. मंत्री ने कहा कि इस मामले में राजस्व मंत्री, राजस्व सचिव और उपायुक्त के साथ बैठक कर जल्द समाधान निकालने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि करीब 22–23 वर्षों से विधायकों को इस सोसाइटी के माध्यम से जमीन नहीं मिल पाई है.
धान खरीद की धीमी रफ्तार पर विपक्ष का हंगामा
सदन में विधायक अरूप चटर्जी ने राज्य में धान खरीद की धीमी गति का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार ने 6 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है, लेकिन अब तक केवल लगभग 3 लाख मीट्रिक टन ही खरीदा जा सका है. कई प्रखंडों में पैक्स के सही तरीके से काम नहीं करने से लक्ष्य पूरा होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस पर मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर धान खरीद की अंतिम तिथि 31 मार्च से आगे बढ़ाई जा सकती है. उन्होंने बताया कि पहली बार किसानों को वन टाइम भुगतान की व्यवस्था की गई है, जबकि मैनपावर की कमी और गोदामों की अलग-अलग लोकेशन के कारण खरीद की गति प्रभावित हुई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मार्च तक लक्ष्य रखना बिचौलियों को फायदा पहुंचाने जैसा है और सरकार को जनवरी तक ही तैयारी पूरी करनी चाहिए थी.
किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की उठी मांग
विधानसभा में विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के कृषि और वन उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि झारखंड में अदरक, महुआ, कटहल और टमाटर जैसे कई उत्पाद बड़े पैमाने पर पैदा होते हैं, लेकिन गुणवत्ता जांच की सुविधा नहीं होने से किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ नहीं मिल पाता. उन्होंने सुझाव दिया कि रांची और देवघर हवाई अड्डे पर मानक गुणवत्ता प्रयोगशाला स्थापित की जाए, ताकि निर्यात से पहले उत्पादों की जांच हो सके. इस पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि विभाग ने इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है. जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार भी पहल कर किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी.

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