पलामू–गढ़वा भाषा विवाद: जेएसटीई नियमावली पर युवाओं का विरोध तेज
“झारखंड कैबिनेट द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (JHTET) के लिए नियमावली को मंजूरी दिए जाने के बाद पलामू और गढ़वा क्षेत्र में भाषा चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ”

पलामू: झारखंड कैबिनेट द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (JHTET) के लिए नियमावली को मंजूरी दिए जाने के बाद पलामू और गढ़वा क्षेत्र में भाषा चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कैबिनेट के फैसले के तहत इस क्षेत्र के लिए नागपुरी और कुडुख को स्थानीय भाषा के रूप में अधिसूचित किया गया है।
हालांकि, इस निर्णय के खिलाफ इलाके के युवाओं में नाराजगी देखी जा रही है। पलामू और गढ़वा के कई युवाओं ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सरकार से यह जानकारी मांगी है कि इन भाषाओं के चयन का आधार क्या था। युवाओं ने कैबिनेट सचिवालय और विजिलेंस विभाग से भी आरटीआई के जरिए जवाब मांगा है।
‘पलमुआ भाषा संघर्ष समिति’ का गठन
इस मुद्दे को लेकर हाल ही में पलामू में ‘पलमुआ भाषा संघर्ष समिति’ का गठन किया गया है, जिसने आंदोलन की घोषणा भी कर दी है। समिति ने फिलहाल पहले चरण में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
समिति के सदस्य राहुल दुबे का कहना है कि पलामू और गढ़वा के अधिकतर छात्र भोजपुरी, मगही और हिंदी भाषी हैं। उनका आरोप है कि नागपुरी भाषा न तो स्कूलों में पढ़ाई जाती है और न ही विश्वविद्यालय स्तर पर इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था है।
‘छात्रों के भविष्य का सवाल’
राहुल दुबे ने इस मामले को केवल भाषा विवाद नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य और समान अवसर से जुड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि यदि स्थानीय भाषा का चयन बिना उचित आधार के किया गया है, तो यह छात्रों के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
पलमुआ भाषा संघर्ष समिति ने इस मामले को आगे बढ़ाते हुए इसे न्यायालय तक ले जाने की भी तैयारी शुरू कर दी है। समिति में सैकड़ों युवा जुड़े हुए हैं और आंदोलन को तेज करने की बात कही जा रही है।

