निशा भगत की मौत पर झारखंड में सियासी उबाल, संजय सेठ-आदित्य साहू ने हेमंत सरकार को घेरा; रौशनी खलखो ने उठाए सवाल
झारखंड की युवा आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की मौत के बाद राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है. संजय सेठ, आदित्य साहू और रांची की मेयर रौशनी खलखो ने हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच, पिठोरिया थाना प्रभारी पर कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग की है.

रांची:- युवा आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की मौत के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है. इस मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस की जवाबदेही और आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. मौत से पहले निशा भगत के फेसबुक लाइव में सामने आए आरोपों के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. केंद्रीय मंत्री संजय सेठ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मामले को गंभीर बताते हुए हेमंत सोरेन सरकार से जवाब मांगा है. वहीं, रांची की मेयर रौशनी खलखो ने भी निशा भगत की मौत पर दुख जताते हुए राज्य सरकार को घेरा है. नेताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, पिठोरिया थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग उठाई है. राजनीतिक नेताओं का आरोप है कि आदिवासी समाज और जमीन से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वाली निशा को परेशानियों का सामना करना पड़ा. हालांकि, इन आरोपों और पुलिस की कथित भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
निशा भगत की मौत ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
निशा भगत को नेताओं ने आदिवासी समाज, गरीबों, किसानों और मजदूरों के मुद्दे उठाने वाली मुखर सामाजिक कार्यकर्ता बताया. उनका कहना है कि वह आदिवासी जमीन की कथित लूट और जमीन दलालों के खिलाफ लगातार आवाज उठा रही थीं. उनकी मौत के बाद भाजपा नेताओं ने इसे गंभीर मामला बताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है.
फेसबुक लाइव और 15 हजार व्यूज को लेकर सवाल
राजनीतिक नेताओं ने दावा किया कि मौत से पहले निशा भगत ने फेसबुक लाइव किया था, जिसे करीब 15 हजार लोगों ने देखा था. लाइव में उन्होंने अपनी परेशानियों और कुछ लोगों की भूमिका का जिक्र किया था. नेताओं का सवाल है कि यदि पुलिस को समय रहते इसकी जानकारी मिली थी, तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई? हालांकि, पुलिस को सूचना मिलने के समय और कार्रवाई से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है.
पिठोरिया थाना प्रभारी की गिरफ्तारी और CBI जांच की मांग
मामले में पिठोरिया थाना प्रभारी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई है. नेताओं का आरोप है कि जमीन विवाद से जुड़े मामलों में प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिलने की आशंका की भी जांच होनी चाहिए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की मांग की गई है.
मेयर रौशनी खलखो ने सरना धर्म और धर्मांतरण का मुद्दा उठाया
रांची की मेयर रौशनी खलखो ने कहा कि निशा भगत आदिवासी समाज, सरना धर्म के संरक्षण और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर मुखर थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन विषयों पर आवाज उठाने के बाद निशा को निशाना बनाया गया. मेयर ने कहा कि समाज के लिए संघर्ष करने वाली बेटियों को सुरक्षा और सहयोग मिलना चाहिए. उन्होंने निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई.
सुभाष मुंडा और रूपा तिर्की के मामलों का भी जिक्र
रौशनी खलखो ने सुभाष मुंडा और रूपा तिर्की के मामलों का उल्लेख करते हुए आदिवासी समाज से जुड़े मामलों में न्याय और सुरक्षा पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने से लोगों में चिंता बढ़ रही है. अब राजनीतिक नेताओं की मांग है कि सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और यदि किसी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो. निशा भगत की मौत के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों का खुलासा अब जांच के नतीजों पर निर्भर करेगा.

