सरस्वती विद्या मंदिर में बच्चों ने प्रस्तुत की छठ पर्व की मनमोहक झांकी, सूर्यदेव को अर्पित किया अर्घ्य
देवघर के कुंडा स्थित उमा नलिनी ब्रह्म सरस्वती विद्या मंदिर में छठ महापर्व के अवसर पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान बच्चों ने छठ पर्व की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की और सामूहिक रूप से सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की.

Deoghar: कुंडा स्थित उमा नलिनी ब्रह्म सरस्वती विद्या मंदिर में शुक्रवार को छठ महापर्व के अवसर पर विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान विद्यालय के भैया-बहनों ने छठ पर्व पर आधारित आकर्षक और मनमोहक झांकी प्रस्तुत की. बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोक आस्था के महापर्व छठ की धार्मिक महत्ता, परंपराओं और रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया. उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित अभिभावकों और विद्यालय परिवार का मन मोह लिया. पूरे विद्यालय परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा. कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को छठ महापर्व की विशेषता और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं से परिचित कराना रहा.
सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर मांगी सुख-समृद्धि की कामना
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य मुकुल कुमार ने सभी भैया-बहनों को दीपावली और छठ महापर्व की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारंपरिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया. इस अवसर पर विद्यालय में उपस्थित सभी भैया-बहनों, आचार्यों और दीदी जी ने सामूहिक रूप से भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया. साथ ही स्वयं, अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की. वहीं, आचार्य गौरव कापरी ने छठ पर्व से जुड़े पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी भक्तिमय हो गया.
बच्चों की प्रस्तुति की अभिभावकों ने की सराहना
बच्चों की आकर्षक झांकी और सांस्कृतिक प्रस्तुति देखकर उपस्थित अभिभावक काफी प्रभावित हुए. उन्होंने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यालय परिवार की इस पहल को सराहनीय बताया. विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और भारतीय परंपराओं से जोड़ना है. इससे बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसका महत्व जानने का अवसर मिलता है. कार्यक्रम को सफल बनाने में आचार्य गौरव कापरी समेत विद्यालय के सभी आचार्यों और दीदी जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा. विद्यालय परिवार ने भी बच्चों की सहभागिता और प्रस्तुति की सराहना की.

