भूकंप से तबाह हुए म्यांमार और थाईलैंड, 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप से 25 से ज्यादा मौतें, सैकड़ों लोग घायल
- Posted on March 28, 2025
- विदेश
- By Bawal News
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म्यांमार और थाईलैंड में 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप ने जबरदस्त तबाही मचाई है. भूकंप की वजह से विशाल इमारतें और पुल ढह गए. 25 से अधिक लोगों की जानें गई हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. 80 लोग लापता हैं. म्यांमार में सुबह करीब 11:50 बजे 7.7 तीव्रता का भूकंप आया. भूकंप के झटके भारत, चीन और बांग्लादेश में भी महसूस किये गये. म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप की वजह से 25 से अधिक लोगों की मौत हुई है. 300 से अधिक लोग घायल हैं. थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक अंडर कंस्ट्रक्शन 30 मंजिला इमारत गिर गई, जहां उस वक्त करीब 400 लोग काम कर रहे थे. इनमें से 80 लोग लापता हैं, जबकि 3 लोगों की मौत हुई है.
थाईलैंड में इमरजेंसी घोषित
भूकंप से भारी तबाही के कारण थाईलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने इमरजेंसी घोषित कर दी है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे और जर्मनी के जीएफज़ेड सेंटर फॉर जियोसाइंस ने कहा है कि भूकंप का केद्र म्यांमार में था. अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने इसे 7.7 तीव्रता का बताया है. जबकि चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने चीन के चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के हवाले से भूकंप की तीव्रता 7.9 बताई है.
भारत समेत 5 देशों में भूकंप का असर
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के मुताबिक मध्य म्यांमार में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. भूकंप का केंद्र सागाइंग शहर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में 10 किमी की गहराई पर था. भारत, बांग्लादेश, चीन समेत 5 देशों में भूकंप का असर देखा गया. भारत में कोलकाता, इंफाल, मेघालय और ईस्ट कार्गो हिल में भूकंप के झटके महसूस किए गए. वहीं बांग्लादेश में ढाका, चटगांव समेत कई हिस्सों में 7.3 तीव्रता के झटके आए.
सागाइंग फॉल्ट की वजह से म्यामांर में भूकंप
म्यांमार में धरती की सतह में चट्टानों के नीचे एक बहुत बड़ी दरार है, जो देश के कई हिस्सों से होकर गुजरती है. यह दरार म्यांमार के सागाइंग शहर के पास से गुजरती है इसलिए इसका नाम सागाइंग फॉल्ट पड़ा. यह म्यांमार में उत्तर से दक्षिण की तरफ 1200 किमी तक फैली हुई है. इसे 'स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट' कहते हैं, यह दरार अंडमान सागर से लेकर हिमालय की तलहटी तक जाती है और पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेट्स के हिलने-डुलने से बनी है. भारतीय प्लेट उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रही है, जिससे सागाइंग फॉल्ट पर दबाव पड़ता है और चट्टानें बगल में सरकती हैं. म्यांमार में कई बड़े भूकंप इसी सागाइंग फॉल्ट की वजह से आए हैं. इससे पहले 2012 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आ चुका है. सागाइंग फॉल्ट के पास 1930 से 1956 के बीच 7 तीव्रता वाले 6 से ज्यादा भूकंप आए थे.
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