Modi Cabinet: MSP Hike समेत 3 बड़े फैसलों पर मुहर, ₹2.79 लाख करोड़ के पैकेज को मिली मंजूरी
“मोदी कैबिनेट ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों के MSP में बढ़ोतरी समेत कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी है. कुसुम के MSP में सबसे अधिक ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि बताई गई है. ”

Modi Cabinet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में किसानों से जुड़ा बड़ा फैसला लिया गया है. आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति यानी CCEA ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है. नई दरों में गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम शामिल हैं. इनमें सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के MSP में 675 रुपये प्रति क्विंटल की हुई है, जबकि गेहूं के MSP में 25 रुपये की वृद्धि की गई है.
क्र.सं. | फसलें | एमएसपी आरएमएस 2027-28 | उत्पादन की लागत (आरएमएस) 2027-28 | लागत की तुलना में मार्जिन (प्रतिशत में) | एमएसपी आरएमएस 2026-27 | एमएसपी में वृद्धि (पूर्ण) |
1 | गेहूं | 2610 | 1264 | 106 | 2585 | 25 |
2 | जौ | 2286 | 1447 | 58 | 2150 | 136 |
3 | चना | 5958 | 3751 | 59 | 5875 | 83 |
4 | मसूर | 7390 | 3854 | 92 | 7000 | 390 |
5 | रेपसीड और सरसों | 6613 | 3367 | 96 | 6200 | 413 |
6 | कुसुम | 7215 | 4810 | 50 | 6540 | 675 |
गेहूं से कुसुम तक, रबी की छह फसलों का MSP बढ़ा
मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए सरकार ने रबी की छह अधिसूचित फसलों के MSP में बढ़ोतरी की है. नए MSP के मुताबिक गेहूं का समर्थन मूल्य 2,610 रुपये प्रति क्विंटल होगा, जो पिछले सीजन के 2,585 रुपये से 25 रुपये अधिक है. जौ का MSP 2,286 रुपये किया गया है, जिसमें 136 रुपये की बढ़ोतरी है. चने का MSP 5,958 रुपये प्रति क्विंटल होगा, यानी 83 रुपये की वृद्धि. मसूर का MSP 7,390 रुपये किया गया है, जिसमें 390 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. रेपसीड और सरसों का MSP 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले MSP से 413 रुपये अधिक है. वहीं कुसुम का MSP सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़कर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. इस तरह छह फसलों में कुसुम के MSP में सबसे बड़ी पूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है.
कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये की बढ़ोतरी
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक रबी सीजन 2027-28 के लिए कुसुम के MSP में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है. इसका नया MSP 7,215 रुपये प्रति क्विंटल होगा. इसके बाद रेपसीड और सरसों के MSP में 413 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और नया मूल्य 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. मसूर के MSP में 390 रुपये की वृद्धि के बाद यह 7,390 रुपये हो गया है. जौ के MSP में 136 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 2,286 रुपये किया गया है. चने के MSP में 83 रुपये की वृद्धि हुई है और नया भाव 5,958 रुपये प्रति क्विंटल होगा. गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हुआ है. इस बढ़ोतरी के साथ सरकार ने अलग-अलग रबी फसलों के लिए उत्पादन लागत के ऊपर अलग-अलग मार्जिन भी तय किया है.
उत्पादन लागत के मुकाबले गेहूं पर 106% मार्जिन
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2027-28 के लिए रबी फसलों के MSP में उत्पादन लागत के मुकाबले अलग-अलग मार्जिन शामिल है. गेहूं के मामले में अनुमानित मार्जिन 106 प्रतिशत है. इसके बाद रेपसीड और सरसों पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चना पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत मार्जिन बताया गया है. सरकार के मुताबिक उत्पादन लागत की गणना में किराए पर लिया गया मानव श्रम, मशीन या पशु श्रम, पट्टे की भूमि का किराया, बीज, उर्वरक, खाद, सिंचाई, कृषि उपकरणों का मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज और डीजल-बिजली जैसी लागतें शामिल होती हैं. परिवार के श्रम का अनुमानित मूल्य भी लागत में शामिल किया जाता है. सरकार का कहना है कि MSP में यह बढ़ोतरी किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने के साथ फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है.
2018-19 की नीति के तहत MSP को लागत से 1.5 गुना रखने का लक्ष्य
रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी केंद्र सरकार की उस नीति के अनुरूप बताई गई है, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना स्तर पर रखने का सिद्धांत अपनाया गया है. यह व्यवस्था केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित की गई थी. PIB के अनुसार सरकार 2018-19 से अधिसूचित फसलों के MSP में उत्पादन लागत के ऊपर कम से कम 50 प्रतिशत मार्जिन रखने की नीति पर काम कर रही है. 2027-28 के लिए भी सरकार ने छह रबी फसलों के उत्पादन लागत और MSP के बीच निर्धारित मार्जिन का विवरण जारी किया है. सरकार का कहना है कि अधिक MSP से किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने के साथ गेहूं जैसे प्रमुख अनाज के अलावा दलहन और तिलहन की खेती को भी बढ़ावा मिल सकता है. हालांकि वास्तविक आय पर असर बाजार कीमत, खरीद और किसान की उपज पर निर्भर करता है.
सरकार ने दलहन और तिलहन को बढ़ावा देने पर दिया जोर
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों में गेहूं और अन्य अनाज के अलावा दलहन तथा तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए MSP व्यवस्था पर जोर देती रही है. नई MSP दरों में भी मसूर, चना, रेपसीड-सरसों और कुसुम जैसी फसलों में गेहूं की तुलना में अधिक पूर्ण वृद्धि की गई है. मसूर का MSP 390 रुपये, सरसों का 413 रुपये और कुसुम का MSP 675 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है. सरकार का तर्क है कि ऐसी कीमतों से किसानों को फसल चुनने में अधिक विकल्प मिल सकते हैं और कृषि उत्पादन में विविधीकरण को प्रोत्साहन मिल सकता है. MSP पर सरकारी खरीद की व्यवस्था भी अलग-अलग फसलों और परिस्थितियों के अनुसार लागू होती है. PIB के अनुसार सरकार 22 अधिसूचित कृषि फसलों के लिए MSP तय करती है, जबकि सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद बाजार की परिस्थितियों और उपलब्ध अधिशेष के आधार पर होती है.
गेहूं की खरीद और किसानों को MSP भुगतान में बढ़ोतरी का दावा
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में पिछले वर्षों के दौरान गेहूं की सरकारी खरीद और MSP के जरिए किसानों को किए गए भुगतान में वृद्धि का उल्लेख किया गया है. दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 लाख मीट्रिक टन थी. इसी अवधि में रबी की छह फसलों की कुल खरीद 3,921 लाख मीट्रिक टन बताई गई है, जबकि पहले की अवधि में यह 2,302 लाख मीट्रिक टन थी. सरकार के मुताबिक 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं उत्पादक किसानों को MSP के रूप में 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.56 लाख करोड़ रुपये थी. छह रबी फसलों के लिए भी संबंधित अवधि में भुगतान बढ़ने का दावा किया गया है.
छह रबी फसलों के किसानों को 8.36 लाख करोड़ भुगतान का दावा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह प्रमुख रबी फसलों के उत्पादक किसानों को MSP के रूप में कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इसकी तुलना में 2004-05 से 2013-14 की अवधि में यह राशि 2.65 लाख करोड़ रुपये बताई गई है. सरकार ने इसे MSP व्यवस्था और कृषि उपज की सरकारी खरीद में विस्तार के संदर्भ में पेश किया है. हालांकि MSP का लाभ किसान को तभी मिलता है जब उसकी उपज संबंधित खरीद व्यवस्था के तहत MSP पर खरीदी जाती है या बाजार मूल्य MSP के आसपास रहता है. PIB के अनुसार सरकारी एजेंसियां बाजार मूल्य MSP से नीचे जाने की स्थिति में उपलब्ध मार्केटेबल सरप्लस की खरीद कर सकती हैं और किसानों के पास सरकारी एजेंसी को बेचने या खुले बाजार में बिक्री करने का विकल्प हो सकता है.
कैबिनेट ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पर भी लिया बड़ा फैसला
कैबिनेट बैठक में किसानों से जुड़े MSP फैसले के अलावा रिन्यूएबल एनर्जी और बिजली ट्रांसमिशन से संबंधित फैसलों पर भी चर्चा हुई. सरकार के अनुसार Green Energy Corridor का उद्देश्य देश में बढ़ती renewable energy क्षमता को बिजली ग्रिड से प्रभावी तरीके से जोड़ना है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सरकार 2030 तक 500 GW से अधिक non-fossil fuel capacity को एकीकृत करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को विस्तार देने पर काम कर रही है. मार्च 2026 में बिजली मंत्रालय ने बताया था कि Green Energy Corridor और Inter-State Transmission System के जरिए बड़े पैमाने पर renewable energy को ग्रिड में शामिल करने की योजना है. ऐसे प्रोजेक्ट सौर और पवन ऊर्जा जैसी परियोजनाओं से बनने वाली बिजली को मांग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने पर केंद्रित हैं. सरकार ने इसे देश के clean energy transition से जोड़कर देखा है.

