इजराइल की सत्ता में बड़ा उलटफेर! नेतन्याहू का दौर खत्म होने के आसार, गादी आइजनकोट बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री
इजराइल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने के आसार हैं. चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बेंजामिन नेतन्याहू बहुमत से दूर रह गए हैं. वहीं विपक्षी नेता गादी आइजनकोट नए प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं.

इजराइल की राजनीति में बड़ा बदलाव होता दिखाई दे रहा है. लंबे समय से देश की सत्ता पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू के सामने अब कुर्सी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. पिछले करीब 16 वर्षों से इजराइल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल नेतन्याहू को इस बार चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं हुआ. दूसरी तरफ विपक्षी खेमे ने सरकार बनाने की दिशा में अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं. इसी बीच राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपने का इरादा जाहिर किया है. राष्ट्रपति कार्यालय के इस रुख के बाद इजराइल में सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं मजबूत होती दिख रही हैं. आइजनकोट के सामने अब छह सप्ताह के भीतर सदन में बहुमत साबित करने की चुनौती होगी. अगर वह इसमें सफल होते हैं तो नेतन्याहू की लंबी राजनीतिक पारी पर विराम लग सकता है और इजराइल को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है.
नेतन्याहू के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती
इजराइल के चुनावी नतीजों ने बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. उनकी लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में गठबंधन पिछड़ गया. नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को कुल 53 सीटें मिली हैं, जबकि सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. ऐसे में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नेतन्याहू के लिए सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं रह गया है.
गादी आइजनकोट को राष्ट्रपति का बुलावा
इस राजनीतिक उठापटक के बीच राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को सरकार बनाने का अवसर देने का संकेत दिया है. राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, शनिवार रात उन्होंने याशर पार्टी के नेता को सरकार गठन की जिम्मेदारी सौंपने का इरादा जाहिर किया. अब आइजनकोट के पास बहुमत का समर्थन जुटाने के लिए छह सप्ताह का समय होगा. यह समय उनके राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ इजराइल की अगली सरकार की दिशा भी तय करेगा.
आइजनकोट ने राष्ट्रीय सरकार बनाने का किया दावा
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद आइजनकोट ने कहा कि देश में एक राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय आ गया है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह अपनी क्षमता साबित करने और सरकार गठन की जिम्मेदारी निभाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. उनके इस बयान से साफ है कि वह केवल सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले दलों को साथ लाकर सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
सेना प्रमुख से प्रधानमंत्री पद के दावेदार तक का सफर
गादी आइजनकोट का राजनीतिक सफर शुरू होने से पहले उनका इजराइल की सेना में लंबा अनुभव रहा है. वह 2015 से 2019 तक इजराइल के सेना प्रमुख रहे. इसके बाद 2022 में उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रखा और यूनिटी पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचे. वर्ष 2023 से 2024 के बीच वह इजराइल की यूनिटी सरकार में मंत्री भी रहे. 2026 के चुनाव में उन्होंने याशर पार्टी का नेतृत्व करते हुए नेतन्याहू के खिलाफ विपक्ष का प्रमुख चेहरा बनने की कोशिश की.
अरब पार्टियों का समर्थन बना सत्ता की चाबी
चुनाव परिणामों में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि आइजनकोट के गठबंधन के खाते में 48 सीटें आईं. वहीं अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं. इन दलों की ओर से आइजनकोट को सहयोग का भरोसा मिलने के बाद उनके समर्थन का आंकड़ा 67 सांसदों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है. यदि यह समर्थन बरकरार रहता है तो वह बहुमत के आंकड़े से आगे निकल सकते हैं. हालांकि, छह सप्ताह के भीतर इस समर्थन को औपचारिक रूप देना और संसद में बहुमत साबित करना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी. अब पूरी दुनिया की नजर इजराइल की राजनीति पर है कि क्या नेतन्याहू की सत्ता का अंत होगा या वह एक बार फिर राजनीतिक समीकरण बदलने में कामयाब होंगे.

