झारखंड CGL पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नियुक्तियां रद्द करने का आदेश खारिज, CID जांच जारी, जानिए कोर्ट ने क्या कहा
झारखंड CGL परीक्षा और नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के रद्दीकरण आदेश को निरस्त कर दिया है. इससे हजारों सफल अभ्यर्थियों और पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है. हालांकि, कथित परीक्षा धांधली की CID जांच जारी रहेगी.

झारखंड में कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा और नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसके तहत CGL परीक्षा की पूरी प्रक्रिया और इसके माध्यम से हुई नियुक्तियों को एकमुश्त रद्द कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने सफल अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार के रद्दीकरण आदेश को खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद परीक्षा में सफल हुए हजारों उम्मीदवारों और पहले से नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है. लंबे समय से अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. हालांकि, परीक्षा में कथित धांधली की जांच जारी रहेगी और अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार किया जा रहा है.
सरकार ने CID जांच और छात्र आंदोलन का दिया था हवाला
दरअसल, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से आयोजित CGL परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही है. सितंबर 2024 में आयोजित इस परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोप लगने के बाद अभ्यर्थियों ने आंदोलन शुरू कर दिया था. परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. मामले की जांच CID को सौंपी गई थी. इसी बीच राज्य सरकार ने CID की जांच रिपोर्ट और छात्र आंदोलनों का हवाला देते हुए CGL परीक्षा की पूरी प्रक्रिया और इसके तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी थी. सरकार के इस फैसले से परीक्षा में सफल हुए उम्मीदवारों की नियुक्तियों पर भी संकट खड़ा हो गया था. जिन युवाओं ने वर्षों की तैयारी के बाद सरकारी नौकरी हासिल की थी, उनका भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता में चला गया था.
आकाश गौरव समेत सफल अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को दी चुनौती
राज्य सरकार के रद्दीकरण आदेश के खिलाफ आकाश गौरव और अन्य सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि CID जांच के दौरान संदिग्ध लोगों को चिह्नित किया जा चुका था. जब जांच में संदिग्धों और कथित रूप से गड़बड़ी में शामिल लोगों की पहचान संभव है, तो उनके खिलाफ अलग-अलग कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे में कुछ लोगों की गलतियों की सजा पूरी परीक्षा में सफल हुए सभी अभ्यर्थियों को देना उचित नहीं है. याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि जिन उम्मीदवारों ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा पास की है, उन्हें दूसरों की कथित गड़बड़ियों के कारण दंडित नहीं किया जाना चाहिए. इसी आधार पर सरकार के सामूहिक रद्दीकरण के फैसले को चुनौती दी गई थी.
सरकार ने सीलबंद रिपोर्ट में बताई थी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट पेश की थी. सरकार की ओर से परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और पूरी व्यवस्था की विफलता का हवाला दिया गया था. सरकार का पक्ष था कि परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. वहीं, सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी की थी कि रिकॉर्ड पर प्रश्नपत्र लीक होने के कोई पुख्ता और आधिकारिक सबूत मौजूद नहीं हैं. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के रद्दीकरण आदेश को निरस्त कर दिया. इस फैसले से पूर्व में हुई CGL चयन प्रक्रिया और उसके आधार पर की गई नियुक्तियों के बने रहने का रास्ता साफ हुआ है. हालांकि, फैसले का पूरा कानूनी आधार अदालत का विस्तृत आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
CGL धांधली की CID जांच रहेगी जारी, विस्तृत आदेश का इंतजार
हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि CGL परीक्षा में कथित धांधली का मामला पूरी तरह समाप्त हो गया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामले की CID जांच जारी रहेगी. यानी जिन लोगों की भूमिका जांच में संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है. दूसरी ओर, पूरी परीक्षा और नियुक्तियों को एक साथ रद्द करने के सरकार के फैसले को अदालत ने निरस्त कर दिया है. अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश पर टिकी हैं. आदेश में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत ने सरकार के फैसले को किन कानूनी आधारों पर खारिज किया है और चयन प्रक्रिया तथा नियुक्तियों को लेकर क्या दिशा-निर्देश दिए हैं. फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले से CGL के सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है और लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है.

