JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: छात्रों का आंदोलन तेज, 7 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, 14वीं JPSC परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर छात्र धरने पर डटे हैं.

Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में छात्र संगठन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. आइसा (AISA) और एआईएसएफ (AISF) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में शामिल छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, दोषियों पर कार्रवाई और 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं. आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 7 अगस्त को विधानसभा मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन को और व्यापक बनाया जाएगा.
JPSC-JSSC परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप
धरना दे रहे छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. उनका दावा है कि कई मामलों में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सीटों का सौदा कर लिया जाता है. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि ओएमआर शीट और कार्बन कॉपी में अंतर जैसी शिकायतें सामने आई हैं, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और कथित धांधली में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.
कट-ऑफ और परिणाम सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि JPSC ने अब तक परीक्षा का कट-ऑफ अंक और श्रेणीवार परिणाम सार्वजनिक नहीं किया है. उनका आरोप है कि अधिक अंक प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए, जबकि कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों का चयन हुआ है. छात्रों का कहना है कि जब तक पूरी चयन प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं होगी, तब तक पारदर्शिता पर सवाल बने रहेंगे. उन्होंने आयोग से सभी अभ्यर्थियों के अंक, कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है.
'अब परीक्षा के चार चरण हैं- प्री, मेन्स, इंटरव्यू और आंदोलन'
आंदोलन के दौरान छात्रों ने व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि अब JPSC परीक्षा के तीन नहीं बल्कि चार चरण हो गए हैं—प्री, मेन्स, इंटरव्यू और आंदोलन. उनका कहना है कि झारखंड राज्य बनने के बाद से JPSC की अधिकांश भर्तियां विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही हैं. छात्रों का आरोप है कि बार-बार सामने आने वाली शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, जिससे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है.
14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने सहित कई मांगें
छात्र संगठनों ने मांग की है कि 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा आयोजित किया जाए. इसके साथ ही स्थानीय एवं नियोजन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने, कथित धांधली में शामिल लोगों और उनसे जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई गई. आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाबदेही तय करनी होगी.
7 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. इसी क्रम में 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक मार्च निकालने की घोषणा की गई है. आंदोलनकारियों का दावा है कि इस मार्च में राज्यभर से बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी और छात्र शामिल होंगे. फिलहाल राजधानी रांची में आंदोलन जारी है और सभी की नजर सरकार तथा JPSC की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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