रांची में जमीन का बड़ा खेल! 31 डिसमिल जमीन पर कब्जे का आरोप, बिल्डर से भिड़ी आदिवासी महिला
“रांची के पिठोरिया में 31 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद सामने आया है. संजू देवी ने मां तारा ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों पर जमीन पर कब्जे की कोशिश, धान की फसल उखाड़ने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं.”

Ranchi: रांची या शहर के आसपास अगर आपके पास बेशकीमती जमीन है और उस जमीन पर बिल्डरों या भू-माफियाओं की नजर लग गई है, तो फिर जमीन बचाना कितना मुश्किल हो सकता है, पिठोरिया का यह मामला उसकी एक तस्वीर दिखाता है. आरोप है कि बड़ा प्रोजेक्ट होने के बाद एक आदिवासी महिला की करीब 31 डिसमिल जमीन विवाद में फंस गई. महिला का कहना है कि उसने न जमीन बेची, न दान में दी, लेकिन अब उसी जमीन पर कब्जे की कोशिश हो रही है. जिस खेत में वह धान रोपती थी, आरोप है कि वहां लगी फसल तक उखाड़कर फेंक दी गई. शिकायत में जान से मारने की धमकी का भी जिक्र है. मामला थाना और प्रशासन तक पहुंच चुका है और अब जमीन की मापी और जांच के बाद तस्वीर साफ होने का इंतजार है.
कैसे फंसा पूरा मामला?
इस महिला का नाम संजू देवी है. वह आदिवासी समुदाय से हैं और रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र के इचापीड़ी गांव में रहती हैं. संजू देवी का आरोप है कि इचापीड़ी में स्थित उनकी जमीन पर मां तारा ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट के लोग कब्जा करना चाहते हैं. खाता नंबर 144, प्लॉट नंबर 1478 और 1479 की करीब 31 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद है. संजू देवी के मुताबिक उन्होंने अपनी जमीन कंपनी को न तो बेची है और न ही दान में दी है. उनका कहना है कि वर्ष 2022-23 और 2023-24 में संबंधित अनुमति और प्रक्रिया के बाद जमीन की विधिवत रजिस्ट्री कराई गई थी.
बाउंड्री के अंदर चली गई संजू देवी की जमीन!
संजू देवी के मुताबिक मां तारा ग्रीन सिटी का प्रोजेक्ट करीब 10 एकड़ में है. इसी प्रोजेक्ट के लिए जो बाउंड्री बनाई गई, उसके अंदर उनकी जमीन का कुछ हिस्सा चला गया है. बाउंड्री के बाहर भी उनकी कुछ जमीन बची हुई है. अब आरोप है कि कंपनी के लोग अपने प्रोजेक्ट तक जाने के लिए संजू देवी की जमीन से रास्ता चाहते हैं. लेकिन संजू देवी अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं. यहीं से पूरा विवाद और गहरा गया. एक तरफ बड़ा ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट है और दूसरी तरफ एक किसान परिवार की खेती वाली जमीन. सवाल यही है कि जमीन की सीमा और रास्ते का विवाद आखिर किस तरह सुलझेगा?
फसल को उखाड़कर फेंक दिया
संजू देवी और उनके पति दिनेश इसी जमीन पर खेती करते हैं. खेती-बाड़ी करके ही परिवार का जीवन-यापन होता है. लेकिन शिकायत के मुताबिक अब कंपनी के लोग उन्हें अपनी जमीन पर खेती नहीं करने दे रहे हैं. 14 अगस्त 2026 को संजू देवी अपने खेत में धान की रोपनी कर रही थीं. इसी बीच बिल्डर के लोगों के वहां पहुंचने का आरोप है. संजू देवी के मुताबिक खेत में रोपे गए पूरे धान को उखाड़कर फेंक दिया गया. सोचिए... किसान धान रोपता है, फसल तैयार होने का इंतजार करता है और उसी फसल से परिवार का पेट पालने की उम्मीद करता है. लेकिन खेत में लगी फसल ही बर्बाद हो जाए तो किसान के पास बचता क्या है?
जमीन के साथ धमकी का भी आरोप
संजू देवी के मुताबिक उन्हें और उनके पति को जान से मारने की धमकी भी दी गई. उनका आरोप है कि ऐसी धमकी दी गई कि मारकर इतने गहरे गड्ढे में फेंक दिया जाएगा कि लाश तक नहीं मिलेगी. पीड़ित परिवार का कहना है कि अपनी जमीन बचाने के लिए थाना से लेकर ब्लॉक तक आवेदन देकर गुहार लगाई जा चुकी है. मामला पिठोरिया थाना भी पहुंचा, लेकिन संजू देवी का आरोप है कि उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली. उनका कहना है कि आए दिन परिवार के लोगों को रास्ते में रोककर मारपीट और जान से मारने की धमकी दी जा रही है. इन आरोपों की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी.
अब मामला सिर्फ जमीन का नहीं, परिवार की रोजी-रोटी का सवाल है
अब ये मामला सिर्फ जमीन के कागज का नहीं रह गया है. एक किसान परिवार के लिए यह उसकी रोजी-रोटी का सवाल बन चुका है. जिस जमीन पर खेती करके परिवार चलता है, उसी जमीन पर खेती करना मुश्किल होने का आरोप है. और जब किसान अपनी ही जमीन पर खेती नहीं कर पाएगा, तो परिवार का पेट कैसे पालेगा? सिर्फ संजू देवी और उनके पति की जमीन ही इस प्रोजेक्ट के कारण विवाद में नहीं पड़ी है. दर्जनों ग्रामीण भी प्रोजेक्ट को लेकर अपनी समस्याएं बता रहे हैं. कोई रास्ते को लेकर परेशान है तो कोई बाउंड्री के कारण खेतों में पानी रुकने की शिकायत कर रहा है.
ग्रामीणों का आरोप—रास्ते के लिए जमीन चाहिए, बाउंड्री से खेतों में पानी रुका
इस प्रोजेक्ट के लिए रास्ता पहनई जमीन से होकर जाना है. ग्रामीणों के मुताबिक कंपनी रास्ते के लिए जमीन मांग रही है. लेकिन पाहन ने साफ कहा है कि किसी कीमत पर कंपनी को पहनई जमीन नहीं दी जाएगी. उधर, प्रोजेक्ट के बाहर जिन लोगों की जमीन है, वे भी परेशान होने का आरोप लगा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने बाउंड्री डाल दी है, जिससे उनके खेतों में जाने वाला पानी रुक गया है. यानी एक तरफ संजू देवी की जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप है, दूसरी तरफ रास्ते के लिए जमीन देने का दबाव और तीसरी तरफ बाउंड्री के कारण खेतों में पानी रुकने की शिकायत है.
ऐसे बढ़ता गया प्रोजेक्ट
अब समझिए ग्रामीण इस पूरे मामले को किस तरह देखते हैं. उनके आरोपों के मुताबिक मां तारा ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट के लिए करीब 3-4 साल पहले थोड़ी जमीन खरीदी गई. इसके बाद वहां ग्रीन सिटी बनाने का प्लान बना और आसपास की जमीन खरीदी जाने लगी. जिसने जमीन बेची, उससे जमीन ली गई. जो जमीन नहीं बेचना चाहता, उसकी जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया जा रहा है. और जो जमीन प्रोजेक्ट के बाहर बची, वहां बाउंड्री के कारण पानी रुकने की शिकायत सामने आ रही है. ग्रामीणों के मुताबिक प्रोजेक्ट बढ़ रहा है और उसके साथ उनकी समस्याएं भी बढ़ रही हैं.
प्रशासन के पास पहुंचा मामला
संजू देवी ने कांके अंचल कार्यालय में आवेदन देकर अपनी जमीन की जांच और अतिक्रमण से मुक्ति की मांग की है. उनके आवेदन के मुताबिक विवादित जमीन की मापी भी हो चुकी है. कांके सीओ मामले की जांच कर रहे हैं. संजू देवी का पक्ष सुना जा चुका है और दूसरे पक्ष को भी सुनवाई के लिए बुलाया गया है. साथ ही विवादित जमीन की मापी हो चुकी है. अब बाउंड्री के अंदर आने वाली जमीन की भी मापी होगी. यानी अब इस पूरे विवाद में जमीन का रिकॉर्ड, वास्तविक सीमांकन और मौके की स्थिति बेहद अहम होने वाली है. इसी के बाद पता चलेगा कि बाउंड्री और जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है.
सवाल अभी बाकी है
लेकिन संजू देवी और उनका परिवार अब भी इंतजार कर रहा है. अपनी जमीन पर खेती कब कर पाएंगे? जमीन कब्जे से मुक्त होगी या नहीं? और विवाद का स्थायी समाधान कब होगा? इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है. जब तक पूरा विवाद खत्म नहीं होता, तब तक किसान परिवार अपनी जमीन पर फसल लगाने को लेकर भी असमंजस में है. एक किसान के लिए जमीन सिर्फ जमीन नहीं होती. वही उसकी खेती है, वही उसकी रोजी-रोटी है और वही उसके परिवार का भविष्य है. अगर किसान अपनी ही जमीन पर खेती नहीं कर पाए, तो मामला सिर्फ जमीन के विवाद तक सीमित नहीं रहता. पूरे परिवार के जीवन पर इसका असर पड़ता है.
बिल्डर का पक्ष सामने नहीं आया
इस मामले में कंपनी का पक्ष जानने के लिए बिल्डर से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. अब कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं. गांव के मुखिया ने इस पूरे मामले पर क्या कहा? कांके बीडीओ का इस विवाद पर क्या जवाब है? और सबसे अहम—मां तारा ग्रीन सिटी के बिल्डर के ऑफिस से आखिर क्या जवाब मिलता है? इन तमाम सवालों के जवाब हमारी ग्राउंड रिपोर्ट की अगली कड़ी में सामने आएंगे. क्योंकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. इस जमीन विवाद में अभी कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब सामने आने बाकी हैं. अगली कड़ी में सामने आएगा इस पूरे जमीन विवाद का एक और बड़ा पहलू.



