झारखंड में ‘वन डे कमिश्नर’ विवाद, बीजेपी ने मांगी जांच
“झारखंड में ‘वन डे कमिश्नर’ विवाद ने सियासी तूल पकड़ लिया है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि 24 घंटे के लिए ट्रांसपोर्ट आयुक्त के अधिकार लेकर अहम फैसले लिए गए. पार्टी ने इस दौरान हुए सभी निर्णयों की जांच और पारदर्शिता की मांग की है.”

Ranchi: झारखंड में प्रशासनिक फैसलों को लेकर सियासत तेज हो गई है. बीजेपी ने राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि परिवहन विभाग में नियमों को दरकिनार कर गंभीर अनियमितता की गई है. पार्टी प्रवक्ता अजय साह का दावा है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने महज 24 घंटे के लिए खुद को परिवहन आयुक्त बना लिया और उसी अवधि में अहम फैसले भी लिए गए. बीजेपी ने इस पूरे मामले की जांच और उन 24 घंटों में लिए गए सभी निर्णयों की समीक्षा की मांग की है.
24 घंटे के ट्रांसपोर्ट आयुक्त
बीजेपी ने आरोप लगाया कि परिवहन सचिव राजीव रंजन ने 10 मार्च को एक कार्यालय आदेश जारी कर परिवहन आयुक्त के सभी अधिकार अपने पास ले लिए. इसके बाद 11 मार्च को दूसरे आदेश के जरिए उसी फैसले को वापस भी ले लिया गया. पार्टी का कहना है कि इस तरह एक दिन के लिए खुद को परिवहन आयुक्त बनाना न केवल प्रशासनिक परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और राज्य सरकार की गजट अधिसूचनाओं का भी उल्लंघन है.
बीजेपी ने यह भी बताया कि राज्य में सड़क सुरक्षा परिषद और कोष प्रबंधन समिति जैसे अहम निकायों में परिवहन आयुक्त की भूमिका सदस्य सचिव के रूप में तय है. ऐसे में अधिकारों का इस तरह हस्तांतरण कई सवाल खड़े करता है. बीजेपी के मुताबिक, यह कदम प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है.
फैसलों की जांच की मांग
बीजेपी ने मांग की है कि जिन 24 घंटों के दौरान यह व्यवस्था लागू रही, उस अवधि में परिवहन विभाग में लिए गए सभी फैसलों की विस्तृत जांच कराई जाए. पार्टी का कहना है कि इस दौरान पास की गई फाइलों, स्वीकृत और अस्वीकृत प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता या लाभ पहुंचाने की संभावना का पता लगाया जा सके.
अजय साह ने यह भी सवाल उठाया कि इस तरह के महत्वपूर्ण आदेश की जानकारी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को क्यों नहीं दी गई, जबकि वे संबंधित समितियों के अध्यक्ष हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी दिखती है और इसे जानबूझकर सीमित दायरे में रखा गया. बीजेपी का कहना है कि इस “24 घंटे के खेल” के पीछे की मंशा स्पष्ट होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.

