DMK-कांग्रेस गठबंधन टूटने पर BJP का हमला, निशिकांत दुबे बोले- ‘INDI अब इतिहास’
तमिलनाडु में DMK और कांग्रेस के 55 साल पुराने गठबंधन के टूटने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर सहयोगी दलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि “INDI अब इतिहास बन चुका है.”

तमिलनाडु की राजनीति में DMK और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी अब खुलकर सामने आ गई है. दोनों दलों के 55 साल पुराने गठबंधन के टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. बीजेपी सांसद Nishikant Dubey ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि “INDI अब इतिहास बन चुका है.”
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर ‘यूज एंड थ्रो’ की राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा अपने सहयोगी दलों का इस्तेमाल करती रही है और मुश्किल समय में उन्हें अकेला छोड़ देती है.
उन्होंने 2004 से 2014 के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के राजनीतिक फायदे कांग्रेस ने उठाए, जबकि उसके सहयोगी दलों के नेताओं को कानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करना पड़ा. इस दौरान उन्होंने DMK नेता Kanimozhi Karunanidhi और पूर्व केंद्रीय मंत्री A. Raja का नाम लेते हुए कांग्रेस पर सहयोगियों को ‘बलि का बकरा’ बनाने का आरोप लगाया.
TVK समर्थन के बाद बढ़ी तकरार
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं. कांग्रेस द्वारा अभिनेता से नेता बने Thalapathy Vijay की पार्टी TVK को समर्थन दिए जाने के बाद DMK और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है. इससे पहले DMK की ओर से कांग्रेस पर “पीठ में छुरा घोंपने” जैसे आरोप भी लगाए गए थे.
संसद में भी दूरी बनाने की तैयारी
गठबंधन टूटने का असर अब संसद में भी दिखाई देने लगा है. DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र लिखकर पार्टी सांसदों की बैठने की व्यवस्था बदलने की मांग की है.
कनिमोझी ने अपने पत्र में कहा कि बदले हुए राजनीतिक हालात और कांग्रेस के साथ गठबंधन समाप्त होने के बाद DMK सांसदों का कांग्रेस सदस्यों के साथ मौजूदा सीटिंग अरेंजमेंट में बने रहना उचित नहीं है.
55 साल पुराने गठबंधन का अंत
कांग्रेस और DMK का गठबंधन तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्ष और द्रविड़ राजनीति की एक बड़ी पहचान माना जाता था. करीब 55 साल तक साथ रहने के बाद अब दोनों दलों की राहें अलग हो चुकी हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस टूट का असर सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है.

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