झारखंड के मरीजों को बड़ी राहत, अब राज्य में ही होगा 21 गंभीर बीमारियों का इलाज
झारखंड सरकार ने राज्य के गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है. अब राज्य के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी. सरकार ने निर्णय लिया है कि झारखंड में ही 21 गंभीर बीमारियों का उपचार सुलभ कराया जाएगा.

Ranchi: झारखंड सरकार ने गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है. अब राज्य के लोगों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में भटकना नहीं पड़ेगा. सरकार ने निर्णय लिया है कि झारखंड में ही 21 गंभीर बीमारियों का इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा और इलाज पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचेगा. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया.
चार बड़े सरकारी अस्पतालों में सुविधा
बैठक में यह तय किया गया कि राज्य के चार प्रमुख सरकारी अस्पतालों में 21 गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा विकसित की जाएगी. इनमें रिम्स रांची, शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल धनबाद, सदर अस्पताल रांची और एमजीएम मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर शामिल हैं. इन अस्पतालों में आवश्यक संसाधन, आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे.
निजी अस्पतालों में भी मिलेगा इलाज
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि इन चार सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ राज्य के चार बड़े निजी अस्पतालों में भी गंभीर बीमारियों का इलाज कराया जाएगा. इसके लिए इच्छुक अस्पतालों को आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी. विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए पैकेज पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी 21 गंभीर बीमारियों का इलाज मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत किया जाएगा. इस योजना के तहत तय पैकेज के अनुसार इलाज होगा, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी.
सिकल सेल एनीमिया पर विशेष फोकस
बैठक में सिकल सेल एनीमिया के मरीजों के इलाज को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सदर अस्पताल रांची में सिकल सेल एनीमिया के इलाज की व्यापक व्यवस्था की जाए. इसके लिए सीएमसी वेल्लोर के साथ एमओयू किया जाएगा ताकि बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा रांची में ही उपलब्ध हो सके. सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को नया बल मिलेगा. गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को अब बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी.

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