इजरायल-ईरान तनाव का असर: पेट्रोल-डीजल के साथ भारत के इन 4 उद्योगों पर भी पड़ सकता है दबाव
इजरायल-ईरान युद्ध का असर केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रह सकता. पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर भारत के स्टील, फर्टिलाइजर, सीमेंट और पावर ट्रांसमिशन जैसे उद्योगों पर भी संकट का खतरा बढ़ गया है. अगर समुद्री आपूर्ति बाधित हुई तो इन सेक्टरों की लागत और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

पश्चिम एशिया में बढ़ते इजरायल-ईरान तनाव ने दुनिया के ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ कई उद्योगों की चिंता बढ़ा दी है. भारत भी इस स्थिति से पूरी तरह अछूता नहीं रह सकता, क्योंकि कई महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चे माल के लिए देश इस क्षेत्र पर निर्भर है. अगर युद्ध लंबा खिंचता है या समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट आती है तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. इससे निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा से जुड़े उद्योगों की लागत बढ़ने का खतरा है. खासकर स्टील, उर्वरक, सीमेंट और पावर ट्रांसमिशन जैसे सेक्टर ऐसे हैं जिनकी उत्पादन प्रक्रिया में पश्चिम एशिया से आने वाले संसाधनों की अहम भूमिका होती है. इसलिए क्षेत्र में जारी तनाव भारतीय उद्योगों के लिए भी एक संभावित आर्थिक चुनौती बन सकता है.
स्टील उद्योग पर बढ़ सकता है दबाव
स्टील सेक्टर को उत्पादन के लिए कई तरह के कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों की जरूरत होती है. इनमें डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) और गैस आधारित ऊर्जा अहम भूमिका निभाते हैं. भारत इन संसाधनों का एक हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है. यदि क्षेत्र में संघर्ष के कारण सप्लाई प्रभावित होती है तो स्टील कंपनियों के लिए लागत बढ़ सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. इससे निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बन सकता है.
फर्टिलाइजर सेक्टर पर पड़ सकता है असर
उर्वरक उद्योग सल्फर और गैस जैसे कई महत्वपूर्ण इनपुट पर निर्भर करता है. सल्फर का इस्तेमाल सल्फ्यूरिक एसिड बनाने में होता है, जो कई उर्वरकों के निर्माण में जरूरी होता है. अगर पश्चिम एशिया से इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित होती है तो उर्वरक उत्पादन प्रभावित हो सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देगा, लेकिन अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले कृषि सीजन पर इसका असर पड़ सकता है.
सीमेंट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर भी प्रभावित हो सकता है
निर्माण उद्योग के लिए चूना पत्थर और जिप्सम जैसे खनिज बेहद महत्वपूर्ण हैं. इनका इस्तेमाल सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों के उत्पादन में किया जाता है. भारत इन खनिजों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है. यदि इस क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित होती है तो सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत भी बढ़ सकती है.
पावर ट्रांसमिशन सेक्टर के सामने भी चुनौती
बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्माण में तांबे के तार और अन्य धातु आधारित सामग्रियों की अहम भूमिका होती है. इनका एक बड़ा हिस्सा भी विदेशों से आयात किया जाता है, जिनमें पश्चिम एशिया का योगदान महत्वपूर्ण है. अगर इस क्षेत्र में व्यापारिक आपूर्ति प्रभावित होती है तो बिजली ढांचे के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर भी असर पड़ सकता है.

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