असम चुनाव में हेमंत सोरेन का तीखा आरोप: रोंगोनदी-चाबुआ में प्रचार से रोका गया, बोले लोकतंत्र कुचला जा रहा
“हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि असम के रोंगोनदी और चाबुआ में उन्हें प्रचार करने से रोका गया. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया.”

असम विधानसभा चुनाव 2026 के ठीक तीन दिन पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि असम की रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा क्षेत्रों में जनसभा करने और जनता से मिलने नहीं दिया गया. कल उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन को भी सभा करने से रोका गया था. इसलिए उन्होंने फोन से सभा में मौजूद असम की जनता को संबोधित किया. हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का हवाला देकर उनका प्रचार रोका जा रहा है. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग बताया. असम के शोषित, वंचित और आदिवासी-चाय बागान श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हेमंत ने 9 अप्रैल को तीर-धनुष पर वोट देने की अपील की. जेएमएम ने असम में 18 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और चाय बेल्ट में तेज प्रचार कर रही है.
रोंगोनदी-चाबुआ में हेमंत सोरेन का प्रचार रोके जाने का आरोप
असम की रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा क्षेत्रों में हेमंत सोरेन जनता से मिलने और संबोधित करने जा रहे थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया. हेमंत सोरेन ने ट्वीट किया, “असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने की फिर कोशिशें की गई. कल कल्पना जी को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया. क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे?”
प्रधानमंत्री कार्यक्रम का हवाला देकर प्रचार रोका
हेमंत सोरेन ने स्पष्ट आरोप लगाया कि उनके प्रचार को रोकने के लिए प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का बहाना बनाया गया. उन्होंने लिखा, “असम की क्रांतिकारी धरती ने कभी झुकना नहीं सीखा है. प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम बताकर आज मुझे प्रचार के लिए जाने नहीं दिया गया. क्या लोकतंत्र अब कार्यक्रमों की आड़ में बंद किया जाएगा? और यह सब कैसे हो रहा है? संवैधानिक संस्थाओं का खुलेआम दुरुपयोग कर, एजेंसियों को हथियार बनाकर.” उन्होंने कहा कि चाय बागान के लाखों शोषित आदिवासी भाई-बहनों को इतने वर्षों से रोकने की कोशिशें नाकाम रही हैं और आगे भी नाकाम रहेंगी.
कल्पना सोरेन को भी रोका गया
कल जेएमएम की स्टार प्रचारक और हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को भी असम में सभा करने से रोका गया था. हेमंत सोरेन ने इस घटना को लेकर भी ट्वीट कर कहा कि यह सिलसिला कल से शुरू हो गया है. उन्होंने लिखा, “इतने वर्षों तक तो चाय बागान के मेरे लाखों शोषित, वंचित आदिवासी समाज के भाइयों-बहनों को रोकने की नाकाम कोशिश की है, और कितना रोक पाओगे? इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज़ दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है.” जेएमएम ने आधिकारिक ट्वीट में भी इस घटना की निंदा की.
चाय बागान श्रमिकों के हक की लड़ाई
हेमंत सोरेन ने अपने ट्वीट में चाय बागान के आदिवासी श्रमिकों के लंबे समय से चले आ रहे शोषण को उठाया. उन्होंने कहा, “असम का शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और पिछड़ा समाज अब जाग चुका है. चाय बागान में रहने वाले लोग भी अब आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. असम के आदिवासी समुदाय को एसटी का अधिकार न देना, कुछ और नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय अन्याय है. चाय बागान के श्रमिकों को ₹500 न्यूनतम मजदूरी मिलना उनका हक है, और यह हक हम लेकर रहेंगे.”
एकजुटता का आह्वान
हेमंत सोरेन ने 9 अप्रैल को मतदान का दिन याद दिलाते हुए जनता से एकजुट होने की अपील की. उन्होंने ट्वीट किया, “आगामी 9 अप्रैल के दिन तीर-धनुष पर बटन दबाकर मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे.” उन्होंने आगे कहा, “आप सभी से अपील है कि सब एकजुट हो जाइए, क्योंकि आपकी एकजुटता ही वर्षों से आपका शोषण करने वालों की सबसे बड़ी हार बनेगी. जितना हमें रोकोगे, हम उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगे.



