अंधविश्वास की आग में जली ममता: हजारीबाग में मां बनी बेटी की कातिल
हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 साल की बच्ची की हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस के मुताबिक अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के चलते वारदात हुई. इस मामले में भाजपा नेता भीम राम, बच्ची की मां और एक तांत्रिक महिला गिरफ्तार हुई हैं. साक्ष्य मिटाने की भी कोशिश की गई.


Bishnugarh: झारखंड के हजारीबाग जिले से सामने आया यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के भीतर जड़ें जमा चुके अंधविश्वास, डर और विकृत सोच का भयावह चेहरा है। 13 साल की एक मासूम बच्ची, जो अपनी मां के साथ मंगला जुलूस देखने निकली थी, कभी घर वापस नहीं लौटी। अगली सुबह उसका शव बांस की झाड़ियों में मिला और पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। शुरुआत में मामला दुष्कर्म और हत्या का माना गया, लेकिन जांच ने जो सच्चाई सामने लाई, उसने हर किसी को झकझोर दिया। इस जघन्य वारदात के पीछे कोई और नहीं, बल्कि खुद उसकी मां निकली। बेटे को बचाने के नाम पर, एक तांत्रिक के कहने पर, मां ने अपनी ही बेटी की बलि दे दी। यह घटना बताती है कि जब अंधविश्वास हावी होता है, तो इंसान रिश्तों और इंसानियत दोनों को भूल जाता है।
कैसे सामने आया मामला
24-25 मार्च की रात के बाद जब बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिवार और गांव वालों में चिंता फैल गई। अगले दिन सुबह कुसुम्भा गांव के पास बांस की झाड़ियों में उसका शव मिला। शव की हालत देखकर लोगों ने दुष्कर्म और निर्मम हत्या की आशंका जताई। परिवार की ओर से भी इसी आधार पर FIR दर्ज कराई गई। मामला गंभीर था, इसलिए पुलिस ने तुरंत विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। शुरुआती माहौल गुस्से और डर से भरा था, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कहानी ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया।
जांच में खुला खौफनाक सच
तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और पूछताछ के आधार पर पुलिस को संदेह परिवार के भीतर ही गया। जब मृतका की मां से सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने जो कबूल किया, वह चौंकाने वाला था। उसने बताया कि बेटे की बीमारी और मानसिक परेशानी से वह बेहद परेशान थी। इसी दौरान उसका संपर्क गांव की एक तांत्रिक महिला से हुआ, जिसने समस्या के समाधान के लिए ‘कुंवारी लड़की की बलि’ देने की सलाह दी। हैरानी की बात यह रही कि मां ने इस बात को सच मान लिया और अपनी ही बेटी को इसके लिए चुन लिया।
वारदात की पूरी साजिश
घटना की रात बच्ची को बहाने से तांत्रिक के घर ले जाया गया। वहां पहले कुछ रस्में निभाई गईं, ताकि बच्ची को शक न हो। इसके बाद मां, तांत्रिक और एक सहयोगी ने मिलकर बच्ची को सुनसान जगह ले जाकर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद तंत्र-मंत्र के नाम पर शव के साथ अमानवीय कृत्य भी किए गए। पूरी घटना पहले से प्लान की गई थी, ताकि इसे किसी बाहरी अपराध की तरह दिखाया जा सके और शक परिवार पर न जाए।
अंधविश्वास और सामाजिक सच्चाई
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की एक बड़ी समस्या को उजागर करती है। आज भी कई ग्रामीण इलाकों में बीमारी या मानसिक परेशानी का इलाज डॉक्टर के बजाय तांत्रिकों और झाड़-फूंक से किया जाता है। शिक्षा की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और अंधविश्वास का गहरा असर लोगों को ऐसे खतरनाक फैसले लेने पर मजबूर कर देता है। इस मामले में ‘पुत्र मोह’ भी एक बड़ा कारण बना, जहां बेटे को बचाने के लिए बेटी की जान ले ली गई।
प्रशासन और कानून की भूमिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने भी स्वतः संज्ञान लिया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। इसके बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मां, तांत्रिक और सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया। अब उन पर हत्या और साजिश सहित कई गंभीर धाराओं में केस चल रहा है। यह मामला प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता और सख्ती दोनों जरूरी हैं।
समाज के लिए सबक
हजारीबाग की यह घटना एक कड़वी सच्चाई सामने लाती है—जब अंधविश्वास हावी हो जाता है, तो इंसान सही-गलत की पहचान खो देता है। एक मां, जो अपने बच्चे की सबसे बड़ी रक्षक होती है, वही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई। इस घटना से यह साफ है कि सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और वैज्ञानिक सोच से ही ऐसे अपराधों को रोका जा सकता है। वरना अंधविश्वास की यह आग आगे भी मासूम जिंदगियों को निगलती रहेगी।

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