ओबीसी कार्ड के साथ सिंगल नॉमिनेशन, झारखंड बीजेपी में आदित्य साहु की ताजपोशी तय
झारखंड बीजेपी में संगठनात्मक बदलाव तय हो गया है. कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. आदित्य प्रसाद साहु का प्रदेश अध्यक्ष बनना लगभग तय है. सिंगल नामांकन के जरिए बीजेपी ने साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी राज्य में ओबीसी वोट बैंक को साधने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है. औपचारिक घोषणा 14 जनवरी को होगी.

Ranchi: झारखंड की सियासत में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक फैसला सामने आया है. भारतीय जनता पार्टी ने संकेतों को हकीकत में बदलते हुए ओबीसी समीकरण पर दांव चला है. पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रो. आदित्य प्रसाद साहु का प्रदेश अध्यक्ष बनना लगभग तय हो गया है. मंगलवार को हुए नामांकन के दौरान अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने अकेले पर्चा दाखिल किया, जिससे उनका निर्विरोध चुना जाना सुनिश्चित माना जा रहा है. औपचारिक घोषणा 14 जनवरी को होगी, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे पहले से तय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से लेकर संगठन में बदलाव तक, बीजेपी झारखंड में नए सिरे से सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है. पार्टी के जानकार इसे सीधे तौर पर ओबीसी वोट बैंक को साधने की कवायद के रूप में देख रहे हैं.
सिंगल नामांकन से तय हुई तस्वीर, 14 जनवरी को औपचारिक ऐलान
मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के 21 सदस्यों के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई. दो घंटे की तय अवधि में अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ प्रो. आदित्य प्रसाद साहु का ही नामांकन हुआ. किसी अन्य नेता के मैदान में न उतरने से यह साफ हो गया कि संगठन के भीतर आम सहमति बन चुकी है. चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव एक दिन पहले ही रांची पहुंचकर केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से राज्य के वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा चुके थे. माना जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर लंबी चर्चा के बाद यह तय किया गया कि संगठन में किसी तरह का टकराव न हो और निर्विरोध चुनाव के जरिए स्पष्ट संदेश दिया जाए. अब औपचारिक ऐलान 14 जनवरी को किया जाएगा, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लगभग अंतिम फैसला माना जा रहा है.
ओबीसी कार्ड और सियासी संदेश, बीजेपी की नई रणनीति
झारखंड में प्रो. साहु को प्रदेश अध्यक्ष बनाना केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाकर सदन के भीतर मोर्चा संभाला, वहीं संगठन की कमान अब ओबीसी पृष्ठभूमि से आने वाले नेता को सौंपने की तैयारी है. पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि राज्य में ओबीसी वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभा सकता है. आदित्य साहु वैश्य समुदाय से आते हैं, जहां बीजेपी की पारंपरिक पकड़ रही है, लेकिन साथ ही उन्हें ओबीसी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाकर व्यापक सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है. यह कदम आगामी चुनावों से पहले संगठन को नई ऊर्जा देने और सामाजिक आधार मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
शिक्षक से संगठन के शीर्ष तक का सफर
61 वर्षीय आदित्य साहु का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू होकर शीर्ष तक पहुंचा है. वे दो दशकों से अधिक समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं और जिला स्तर की राजनीति से आगे बढ़ते हुए प्रदेश संगठन में अहम भूमिका निभा चुके हैं. उपाध्यक्ष और महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के बाद उन्हें कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. पेशे से शिक्षक रहे साहु 2019 तक राम टहल चौधरी कॉलेज में व्याख्याता रहे और जुलाई 2022 में झारखंड से राज्यसभा सांसद चुने गए. सधे हुए व्यक्तित्व, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक समीकरणों की समझ के कारण उन्हें मजबूत दावेदार माना जाता रहा है. अब प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के साथ ही उनसे संगठन को नई दिशा देने की उम्मीदें जुड़ गई हैं.

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