मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, तत्काल बैठक बुलाने की मांग
“राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति और कामकाज शुरू कराने की मांग को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने संबंधित समिति की तत्काल बैठक बुलाकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कराने और आयोग में लंबित अपीलों व शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने का आग्रह किया है.”

Ranchi: झारखंड में राज्य सूचना आयोग के कामकाज को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए संबंधित समिति की तत्काल बैठक बुलाने और राज्य सूचना आयोग में अपीलों एवं शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने की मांग की है. बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कहा है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है. इसके कारण आयोग में सुनवाई का कामकाज शुरू नहीं हो पाया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के साथ-साथ इसकी स्पष्ट समयसीमा से अवगत कराने का आग्रह किया है. पत्र में पूर्व में हुई बैठक और मुख्यमंत्री की ओर से जल्द नियुक्ति किए जाने के आश्वासन का भी उल्लेख किया गया है.
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति का मुद्दा
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर हुई बैठक का उल्लेख किया है. उनके अनुसार, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में उनके अलावा मंत्री हफीजुल हसन भी मौजूद थे. पत्र के मुताबिक, बैठक के दौरान उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में स्पष्ट रूप से सवाल किया था, जिस पर मुख्यमंत्री की ओर से जल्द नियुक्ति किए जाने का आश्वासन दिया गया था. हालांकि, पत्र में कहा गया है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद भी मुख्य सूचना आयुक्त का पद अब तक नहीं भरा गया है. मरांडी ने सवाल उठाया कि जब आयोग में सुनवाई का कामकाज शुरू नहीं हुआ है, तो नियुक्त किए गए सूचना आयुक्तों का लाभ उन नागरिकों को कैसे मिलेगा, जो अपनी अपील और शिकायतों की सुनवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री के आश्वासन का पत्र में किया गया जिक्र
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि मुख्यमंत्री के आश्वासन पर विश्वास करते हुए उन्होंने नियुक्ति संबंधी अनुशंसा पर अपनी सहमति दी और हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने लिखा है कि यदि उन्हें पहले से यह जानकारी होती कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति लंबित रहेगी और आयोग का कामकाज शुरू नहीं हो पाएगा, तो वह उस समय हस्ताक्षर नहीं करते. पत्र में मरांडी ने मुख्यमंत्री के आश्वासन को लेकर सवाल भी उठाया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा करने वाले जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्हें जनता के बीच इस स्थिति का जवाब देना पड़ रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपेक्षा जताई है कि पूर्व में दिए गए आश्वासन के अनुरूप नियुक्ति की प्रक्रिया को अब समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और राज्य सूचना आयोग को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाएगा.
हाईकोर्ट में चली जनहित याचिका का भी किया उल्लेख
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में राज्य सूचना आयोग से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में चली जनहित याचिका का भी उल्लेख किया है. पत्र के अनुसार, सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी किए जाने के आश्वासन के आधार पर जनहित याचिका का निष्पादन हुआ था. मरांडी ने कहा है कि इस आश्वासन के बाद सरकार का दायित्व था कि राज्य सूचना आयोग को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाता. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आयोग का काम शुरू कराने के लिए किसी नागरिक को दोबारा अदालत का रुख करना पड़े और लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़े, तो इससे होने वाली अतिरिक्त देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी होगी. पत्र में उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि जिस काम को सरकार अपने स्तर पर समय पर पूरा कर सकती है, उसके लिए आम लोगों को बार-बार अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़े.
RTI के अधिकार और लंबित अपीलों को लेकर जताई चिंता
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने सूचना के अधिकार यानी RTI के महत्व का भी उल्लेख किया है. उन्होंने कहा है कि सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी कामकाज के बारे में सवाल पूछने और जवाब प्राप्त करने का अधिकार देता है. पत्र के अनुसार, राज्य सूचना आयोग में सुनवाई नहीं होने से यह अधिकार व्यवहार में प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा कि समय पर सूचना नहीं मिलने की स्थिति में कई मामलों में उसे प्राप्त करने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है. मरांडी ने इस स्थिति को अनिश्चितकाल तक जारी रखना जनता के हित में नहीं होने की बात कही है. उन्होंने मुख्यमंत्री से मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति जल्द पूरी कराने और राज्य सूचना आयोग में लंबित अपीलों एवं शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने का आग्रह किया है, ताकि सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
संबंधित समिति की तत्काल बैठक बुलाने की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मुख्य सूचना आयुक्त के चयन के लिए संबंधित समिति की बैठक अविलंब बुलाने का आग्रह किया है. साथ ही उन्होंने नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कराने और राज्य सूचना आयोग में अपीलों एवं शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने की मांग की है. पत्र में उन्होंने इन सभी कार्यों के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने और इसकी जानकारी उन्हें उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है. मरांडी ने पत्र के अंत में उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री के पूर्व आश्वासन के अनुरूप इस बार समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी और नागरिकों को अपने सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों के लिए और प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी. अब इस पत्र के बाद मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी.


