14 जिलों में 130 करोड़ की अवैध निकासी का दावा, बाबूलाल मरांडी ने CM को लिखी चिट्ठी; ट्रेजरी घोटाले की CBI जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने झारखंड के कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री Hemant Soren को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है. मरांडी ने दावा किया है कि राज्य के 14 जिलों में करीब 130 करोड़ रुपये की संदिग्ध निकासी हुई है .


Ranchi: झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर सियासत तेज होती दिख रही है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. मरांडी का दावा है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य में संगठित भ्रष्टाचार और सरकारी धन की सुनियोजित निकासी का गंभीर उदाहरण है. उन्होंने पत्र में आरोप लगाया है कि अब तक करीब 14 जिलों में अवैध निकासी के मामलों की पुष्टि हुई है और विभिन्न कोषागारों से लगभग 130 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध निकासी सामने आई है. मरांडी ने कहा कि अगर समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है तथा कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है.
पहले भी लिखा था पत्र, अब कार्रवाई नहीं होने पर फिर उठाए सवाल
15 मई को लिखे गए अनुस्मारक पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने 11 अप्रैल 2026 को भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कथित ट्रेजरी घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने का आग्रह किया था. लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई. पत्र में कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को जल्द कदम उठाना चाहिए. मरांडी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि समय रहते व्यापक जांच नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. उन्होंने दावा किया कि सामने आ रही जानकारी के अनुसार हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, रामगढ़, देवघर, जमशेदपुर, साहिबगंज समेत करीब 14 जिलों में ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले सामने आए हैं.
बड़े नेटवर्क का आरोप
पत्र में मरांडी ने बोकारो और हजारीबाग जिलों के मामलों का विस्तार से उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि बोकारो में गिरफ्तार लेखापाल कौशल पांडे को पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी बताना पर्याप्त नहीं माना जा सकता. मरांडी का दावा है कि ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़, सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव और करोड़ों रुपये की निकासी जैसे मामलों में केवल एक कर्मचारी की भूमिका मानना तर्कसंगत नहीं लगता. उन्होंने बोकारो में पदस्थापित कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है. पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि मृतक सिपाही उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन राशि कथित रूप से कई बार दूसरे खातों में स्थानांतरित हुई, लेकिन लंबे समय तक इसकी जानकारी नहीं हुई. मरांडी के अनुसार, बोकारो में कथित अवैध निकासी की राशि शुरुआती आंकड़ों से बढ़कर लगभग 16 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है.
हजारीबाग में 30 करोड़ तक निकासी का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में हजारीबाग जिले का भी जिक्र किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि यहां ट्रेजरी से अवैध निकासी की राशि लगभग 30 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. पत्र के अनुसार, कुछ कर्मचारियों और पुलिस विभाग से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की आवश्यकता है. मरांडी ने दावा किया कि कथित अवैध कमाई से संपत्ति, वाहन और अन्य निवेश किए जाने की बातें जांच में सामने आ सकती हैं. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों तक जांच सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा.
अफसरों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच की मांग
पत्र में मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, उन्हें पूर्व में वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा पत्र या संरक्षण कैसे मिला. उन्होंने संकेत दिया कि मामले में संस्थागत स्तर पर संरक्षण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ट्रेजरी घोटाले का दायरा कितना बड़ा है और इसमें किन-किन स्तरों की भूमिका रही है.

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