Assam Election 2026: कल्पना सोरेन की हुंकार—‘यह अस्तित्व और अधिकार की लड़ाई’, गोसाईंगांव में JMM का शक्ति प्रदर्शन
असम विधानसभा चुनाव 2026 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी चुनावी सक्रियता तेज कर दी है. गांडेय विधायक और झारखंड की प्रमुख आदिवासी नेता कल्पना सोरेन ने गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी फ्रेडरिक हांसदा के समर्थन में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया.

Assam: असम विधानसभा चुनाव 2026 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी चुनावी सक्रियता तेज कर दी है. गांडेय विधायक और झारखंड की प्रमुख आदिवासी नेता कल्पना सोरेन ने गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी फ्रेडरिक हांसदा के समर्थन में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने आदिवासी और चाय बागान मजदूर समुदाय को केंद्र में रखते हुए चुनाव को “अस्तित्व, अधिकार और सम्मान की लड़ाई” बताया.
यह चुनाव हमारे अस्तित्व का है
सभा को संबोधित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि यह चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि असम के आदिवासियों के भविष्य का फैसला करेगा. उन्होंने कहा, वर्षों से चाय बागानों में मेहनत करने वाले हमारे भाई-बहनों को उनका हक और सम्मान नहीं मिला. अब समय आ गया है कि हम अपने अधिकार खुद मांगें और सम्मान वापस लें.” उन्होंने आदिवासी अस्मिता पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी समाज कभी झुककर नहीं जीता और अपने हक के लिए लड़ना जानता है.
आदिवासी वोट बैंक पर फोकस
JMM इस बार असम में 18 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है और उसकी रणनीति चाय बागान क्षेत्रों (Tea Tribes) व आदिवासी बहुल इलाकों पर केंद्रित है. इन इलाकों में संथाल, मुंडा और उरांव समुदाय के लोगों की बड़ी आबादी है, जो मूल रूप से झारखंड से जुड़े हैं. अनुमान है कि असम में इन समुदायों की आबादी 60 से 90 लाख के बीच है.
अबुआ राज’ मॉडल और कल्याणकारी योजनाएं
पार्टी असम में झारखंड के “अबुआ राज” मॉडल को प्रचारित कर रही है. साथ ही महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं—जैसे फूल-झानो मां सम्मान योजना का जिक्र कर आदिवासी और महिला मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
राजनीतिक टकराव भी तेज
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने JMM को “बाहरी पार्टी” बताते हुए उसकी आलोचना की है. वहीं JMM नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई आदिवासी अधिकारों और सम्मान के लिए है, न कि सिर्फ चुनावी राजनीति के लिए.
गोसाईंगांव में दिखा असर
कल्पना सोरेन की जनसभा के बाद गोसाईंगांव और आसपास के इलाकों में JMM के ‘तीर-धनुष’ चुनाव चिन्ह को लेकर चर्चा तेज हो गई है. उनकी आक्रामक अपील से आदिवासी और चाय बागान समुदाय में हलचल देखी जा रही है.
9 अप्रैल को होगी अग्निपरीक्षा
असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि JMM की यह रणनीति और आदिवासी मुद्दों पर फोकस उसे कितना राजनीतिक फायदा दिला पाता है. जोहार असम!” के नारे के साथ समाप्त हुई इस सभा ने साफ संकेत दे दिया है कि JMM इस बार असम की सियासत में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है.

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