गिरिडीह के 7 स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 25 पद खाली, 3 हेल्थ सेंटर में एक भी डॉक्टर नहीं
गिरिडीह जिले के माल्डा, घंघरीकुरा और बलहारा प्रथामिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी डॉक्टर नहीं है. मजबूरी में इलाके के गरीब मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है.


रांची
:
झारखंड में स्वास्थ्य विभाग को खुद इलाज की जरूरत पड़ गई है. झारखंड के अस्पताल सालों से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं. सैकड़ों स्वास्थ्य केंद्र तो बिना डॉक्टरों के स्वास्थ्यकर्मियों के भरोसे चल रहे हैं.
गिरिडीह जिले के 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इन 7 स्वास्थ्य केंद्रों में 32 डॉक्टरों का पद सृजित है, लेकिन पोस्टिंग सिर्फ 9 डॉक्टरों की हुई है. जिले के माल्डा
,
घंघरीकुरा और बलहारा स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के 2-2 पद सृजित हैं, लेकिन वहां एक भी डॉक्टर नहीं है. वहीं गांवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 7 डॉक्टरों का पद सृजित है. यहां सिर्फ एक डॉक्टर पदस्थापित हैं. 6 डॉक्टरों की जगह खाली है. तिसरी सीएचसी में 7 डॉक्टरों का पद सृजित है, जबकि कार्यरत सिर्फ 4 हैं. धनवार रेफरल अस्पताल में भी 7 डॉक्टरों का पद खाली है.
किस स्वास्थ्य केंद्र में कितने डॉक्टर
स्वास्थ्य केंद्र
डॉक्टर के स्वीकृत पद
पदस्थापन
खाली पद
PHC,
माल्डा
2
0
2
PHC,
घंघरीकुरा
2
0
2
PHC,
बलहारा
2
0
2
CHC,
गांवा
7
1
6
CHC,
तिसरी
7
4
3
रेफरल अस्पताल, धनवार
10
3
7
PHC,
पिहरा
2
1
1
गरीब मरीजों को जाना पड़ रहा प्राइवेट अस्पताल
गिरिडीह जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं होने के कारण पहले ही लोगों को रांची, हजारीबाग, धनबाद, देवघर जैसे दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है. सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी होने के कारण गरीब लोगों को मामूली बीमारियों के इलाज की भी सुविधा नहीं मिल रही है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी को पत्र लिखा है और जल्द से जल्द डॉक्टरों के खाली पदों को भरने की मांग की है.

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