शेयर बाजार की गिरावट में डूबे दिग्गज, रिलायंस को ₹46,078 करोड़ की चोट; SBI-LIC ने बचाई सरकारी कंपनियों की लाज
“सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच देश की टॉप-10 कंपनियों में से 7 के मार्केट कैप में 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई. सबसे ज्यादा नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ, जबकि SBI, LIC और L&T ने गिरते बाजार में भी मजबूती दिखाई. यह उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए क्या संकेत देता है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट.”

भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह उतार-चढ़ाव और निवेशकों की चिंता लेकर आया. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों पर भी साफ दिखाई दिया. टॉप-10 कंपनियों में से सात के मार्केट कैपिटलाइजेशन में संयुक्त रूप से 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई. सबसे बड़ा झटका मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज को लगा, जिसका बाजार मूल्यांकन अकेले 46,078 करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया. दूसरी ओर, सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) गिरते बाजार में भी मजबूती दिखाने में सफल रहीं. बाजार के इस उतार-चढ़ाव ने एक बार फिर साबित किया है कि वैश्विक संकेतों, निवेशकों की धारणा और सेक्टोरल रोटेशन का असर सबसे बड़ी कंपनियों पर भी पड़ता है.
सेंसेक्स-निफ्टी की गिरावट का असर
बीते सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 639.61 अंक यानी 0.84 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी 171.55 अंक यानी 0.72 प्रतिशत फिसल गया. यह सप्ताह ट्रेडिंग दिनों की संख्या कम होने के बावजूद निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा. बाजार में बिकवाली का दबाव बड़े शेयरों पर ज्यादा दिखाई दिया, जिसके कारण कई दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट दर्ज की गई. विश्लेषकों के अनुसार निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक संकेतों, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की रणनीति और सेक्टर आधारित मुनाफावसूली पर नजर बनाए हुए हैं. ऐसे माहौल में लार्ज कैप कंपनियां भी दबाव से नहीं बच सकीं.
रिलायंस को सबसे बड़ा झटका
देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे अधिक नुकसान हुआ. कंपनी का बाजार पूंजीकरण 46,078.30 करोड़ रुपये घटकर 17.87 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. रिलायंस के शेयरों में सप्ताह के दौरान लगातार दबाव देखने को मिला और बाजार में कमजोरी का सबसे बड़ा असर इसी कंपनी पर पड़ा. दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ एक सप्ताह पहले रिलायंस शीर्ष 10 कंपनियों में सबसे बड़ी लाभार्थी बनी थी और उसके मार्केट कैप में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी. लेकिन बाजार का रुख बदलते ही वही कंपनी सबसे बड़ी नुकसान उठाने वाली बन गई.
HDFC Bank, Airtel और TCS भी दबाव में
रिलायंस के अलावा एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार मूल्यांकन में भी गिरावट दर्ज की गई. एचडीएफसी बैंक के मार्केट कैप में 33,333 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई, जबकि भारती एयरटेल को 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस जैसी कंपनियां भी बिकवाली की चपेट में रहीं. इससे साफ है कि गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं थी, बल्कि बैंकिंग, आईटी, टेलीकॉम और कंज्यूमर सेक्टर तक इसका प्रभाव दिखाई दिया.
सरकारी कंपनियों ने दिखाई मजबूती
जहां निजी क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां दबाव में रहीं, वहीं कुछ सरकारी कंपनियों ने निवेशकों को राहत दी. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का बाजार पूंजीकरण 13,753 करोड़ रुपये बढ़ा, जबकि एलआईसी के मार्केट कैप में 6,040 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई. लार्सन एंड टुब्रो ने भी 20,608 करोड़ रुपये की बढ़त हासिल की. विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी निवेश से जुड़े क्षेत्रों में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है. यही वजह है कि बाजार में कमजोरी के बावजूद कुछ कंपनियां बढ़त दर्ज करने में सफल रहीं.
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
यह गिरावट ऐसे समय आई है जब भारतीय शेयर बाजार हाल के महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाइयों और तेज उतार-चढ़ाव दोनों का अनुभव कर चुका है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय कंपनियों की बुनियादी स्थिति और दीर्घकालिक संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए. रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस और एसबीआई जैसी कंपनियां अब भी भारतीय बाजार की रीढ़ मानी जाती हैं. इसलिए बाजार मूल्यांकन में एक सप्ताह की गिरावट को निवेशकों के लिए अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता.
क्या यह सिर्फ करेक्शन है या बड़ी चेतावनी?
वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि बाजार में अभी व्यापक घबराहट जैसी स्थिति नहीं है. अगर ऐसा होता तो सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों में समान रूप से गिरावट दिखाई देती. लेकिन यहां कुछ कंपनियां नुकसान में हैं तो कुछ लाभ में भी. इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सेक्टर आधारित रणनीति अपना रहे हैं. हालांकि रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनी का एक सप्ताह में 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बाजार मूल्य गंवाना इस बात का संकेत जरूर है कि बड़े निवेशक भी फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं. आने वाले सप्ताहों में वैश्विक बाजार, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश और घरेलू आर्थिक आंकड़े तय करेंगे कि यह गिरावट सिर्फ एक सामान्य करेक्शन थी या किसी बड़े ट्रेंड की शुरुआत.

