15 साल बाद बढ़ा झारखंड भवन का रूम रेंट, 750 से 5000 रुपये तक तय हुआ शुल्क
“करीब 15 साल बाद झारखंड सरकार ने नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन और न्यू झारखंड भवन के कमरों के आवास शुल्क में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. नई व्यवस्था के तहत निजी उपयोग पर ठहरने वाले लोगों को अब 750 रुपये से लेकर 5000 रुपये प्रतिदिन तक शुल्क देना होगा.”

Ranchi: झारखंड सरकार ने नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन (वसंत विहार) और न्यू झारखंड भवन (बंगला साहिब रोड) के कमरों के आवास शुल्क में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई. करीब 15 साल बाद आवास शुल्क में संशोधन किया गया है. सरकार का कहना है कि वर्तमान शुल्क वर्ष 2011 से लागू था और दिल्ली में अन्य राज्यों के भवनों की तुलना में काफी कम होने के कारण राजस्व हानि हो रही थी. इसी को देखते हुए नई दरें तय की गई हैं. संशोधित व्यवस्था में सरकारी कार्य, निजी उपयोग और सामान्य लोगों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं. साथ ही ठहरने की अवधि के आधार पर भी दरें तय की गई हैं.
मंत्रियों को मुफ्त सुविधा, निजी उपयोग पर बढ़ेगा शुल्क
नई व्यवस्था के तहत राज्य के मंत्री, पूर्व मंत्री, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और जिला न्यायाधीशों को सरकारी कार्य के दौरान नि:शुल्क आवास सुविधा मिलती रहेगी. सरकारी सेवकों के लिए सरकारी कार्य पर 100 रुपये प्रतिदिन शुल्क तय किया गया है. वहीं निजी कार्य से ठहरने वाले सरकारी सेवकों के लिए 1 से 3 दिन तक 750 रुपये, 4 से 6 दिन तक 1000 रुपये और 7 दिन या उससे अधिक अवधि के लिए 2000 रुपये प्रतिदिन शुल्क निर्धारित किया गया है. विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए 100 रुपये शुल्क तय किया गया है. इसके अलावा मंत्रियों, न्यायाधीशों और विधायकों के पारिवारिक सदस्यों के लिए भी अलग-अलग शुल्क लागू होंगे. अन्य सामान्य व्यक्तियों के लिए 1 से 3 दिन तक 3000 रुपये, 4 से 6 दिन तक 4000 रुपये और 7 दिन या उससे अधिक अवधि तक ठहरने पर 5000 रुपये प्रतिदिन शुल्क देना होगा.
समिति की सिफारिश पर लिया गया फैसला
सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति ने नई दिल्ली स्थित अन्य राज्यों के भवनों की दरों का अध्ययन करने के बाद शुल्क बढ़ाने की अनुशंसा की थी. समिति ने आवास शुल्क, अवधि विस्तार, प्रोटोकॉल सुविधा और अवैध आवास को नियंत्रित करने को लेकर रिपोर्ट सौंपी थी. नई व्यवस्था में यह भी तय किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को तीन से अधिक कमरे आवंटित नहीं किए जाएंगे. साथ ही 30 दिनों के भीतर लगातार या अलग-अलग अवधि में तीन दिन से अधिक रुकने पर बढ़ी हुई दरों के अनुसार शुल्क लिया जाएगा. सरकार का मानना है कि नई दरों से भवनों के रखरखाव और संचालन में सुविधा होगी.

