क्या बंद होने वाले हैं कागजी नोट? RBI के नए प्लान ने बढ़ाई हलचल
“सोशल मीडिया पर कागजी नोटों के बंद होने और प्लास्टिक नोटों की शुरुआत की चर्चाएं तेज हैं. हालांकि RBI ने अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है. जानिए पॉलीमर नोटों की खासियत, संभावित ट्रायल और भारत में करेंसी सिस्टम को लेकर रिजर्व बैंक की भविष्य की योजना.”

Ranchi:-हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक आधारित नोटों को प्रचलन में ला सकता है. कुछ दावों में यह भी कहा जा रहा है कि 1 जून से इस दिशा में प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इन खबरों के बीच लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या मौजूदा नोट बंद होने वाले हैं और क्या देश की मुद्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है. हालांकि अब तक RBI या वित्त मंत्रालय की ओर से कागजी नोटों को बंद करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. चर्चा मुख्य रूप से पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों के संभावित उपयोग को लेकर है. दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल हो रहे ये नोट अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाले माने जाते हैं. ऐसे में भारत में भी इन्हें अपनाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है.
आखिर क्यों प्लास्टिक नोटों पर हो रही है चर्चा?
भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है, लेकिन नकद लेन-देन की अहमियत अब भी बनी हुई है. बाजार में बड़ी संख्या में कागजी नोटों का उपयोग होता है, जिसके कारण वे जल्दी खराब हो जाते हैं. बार-बार उपयोग से नोट फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं या उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. ऐसे नोटों को वापस लेकर नए नोट छापना RBI के लिए एक महंगी प्रक्रिया होती है.
इसी कारण केंद्रीय बैंक लंबे समय से ऐसे विकल्पों की तलाश में है जो अधिक समय तक चल सकें और रखरखाव की लागत को कम कर सकें. पॉलीमर नोट इसी दिशा में एक संभावित समाधान माने जा रहे हैं.
छोटे मूल्यवर्ग के नोटों से शुरू हो सकता है परीक्षण
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि प्लास्टिक नोटों को लागू करने का फैसला लिया जाता है तो शुरुआत छोटे मूल्यवर्ग से की जा सकती है. ₹10 और ₹20 के नोट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और अपेक्षाकृत जल्दी खराब भी हो जाते हैं.
संभावना है कि पहले इन नोटों का सीमित स्तर पर परीक्षण किया जाए. इस दौरान उनकी मजबूती, सुरक्षा और आम लोगों की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा. यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो धीरे-धीरे अन्य मूल्यवर्ग के नोटों को भी इस तकनीक में बदला जा सकता है.
प्लास्टिक नोटों की क्या होंगी खासियतें?
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं. ये पानी, नमी और सामान्य टूट-फूट से बेहतर तरीके से सुरक्षित रहते हैं. इन्हें आसानी से मोड़ा जा सकता है, लेकिन इनके फटने या खराब होने की संभावना कम होती है.
इसके अलावा इन नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़े जा सकते हैं. विशेष प्रकार की स्याही, पारदर्शी सुरक्षा विंडो और उन्नत होलोग्राम जैसी तकनीकें नकली नोटों की चुनौती को कम करने में मदद कर सकती हैं. यही कारण है कि कई देश इन्हें सुरक्षित मुद्रा विकल्प के रूप में अपना चुके हैं.
दुनिया के कई देशों में पहले से हो रहा उपयोग
प्लास्टिक नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में की गई थी. इसके बाद कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, वियतनाम, रोमानिया और मालदीव सहित कई देशों ने पॉलीमर मुद्रा को अपनाया.
इन देशों के अनुभव बताते हैं कि प्लास्टिक नोटों की उम्र कागजी नोटों की तुलना में अधिक होती है, जिससे बार-बार नोट बदलने की जरूरत कम पड़ती है. इससे मुद्रा प्रबंधन की लागत में भी कमी आती है.
क्या 1 जून से लागू हो जाएगी नई व्यवस्था?
सोशल मीडिया पर चल रही कई पोस्ट में 1 जून से प्लास्टिक नोटों की शुरुआत का दावा किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. RBI और वित्त मंत्रालय की ओर से ऐसी कोई घोषणा जारी नहीं की गई है कि मौजूदा कागजी नोट बंद कर दिए जाएंगे.
फिलहाल सभी भारतीय नोट पूरी तरह वैध हैं और उनका उपयोग सामान्य रूप से जारी रहेगा. हालांकि, भविष्य में यदि पॉलीमर नोटों को अपनाने का फैसला लिया जाता है तो यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. ऐसे में लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए.


