JPSC में 128 बाहरी अभ्यर्थी? Bawal News की पड़ताल में दावा फेल, सिर्फ 7 का दिल्ली-हरियाणा-राजस्थान कनेक्शन
JPSC के 155 अनारक्षित चयन में 63 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी भी शामिल, 92 में 41 का गृह राज्य झारखंड से बाहर; दिल्ली-हरियाणा-राजस्थान से कुल 7 अभ्यर्थी


रांची: झारखंड की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा एक बार फिर चर्चा में है. सोशल मीडिया पर एक दावा वायरल हो रहा है. दावे पर छात्र राजनीति पनप रही है. मीडिया रिपोर्ट और INTERVIEW हो रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि 150 अनारक्षित सीटों में 128 अभ्यर्थियों का चयन दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से हुआ है. अब इस दावे की पड़ताल जब बवाल न्यूज ने की तो सामने आए दस्तावेजों ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है.
दस्तावेज के मुताबिक 11वीं-13वीं JPSC के परिणाम में 155 अभ्यर्थियों का चयन अनारक्षित श्रेणी में हुआ. लेकिन इन 155 में 63 ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो SC, ST, EBC और OBC जैसे आरक्षित वर्गों से आते हैं और अपनी मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीटों पर चयनित हुए.
इसके बाद बचे 92 अनारक्षित अभ्यर्थियों की पड़ताल की गई. इनमें 41 अभ्यर्थियों का गृह राज्य झारखंड से बाहर हैं. लेकिन दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को मिलाकर संख्या सिर्फ 7 निकलती है.
यानी सोशल मीडिया पर चल रहा 128 वाला आंकड़ा और दस्तावेज में सामने आया वास्तविक आंकड़ा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है.
155 अनारक्षित सीटों का पूरा गणित क्या है?
सबसे पहले उस आंकड़े को समझना जरूरी है, जिससे पूरा विवाद शुरू हुआ. 11वीं-13वीं JPSC के परिणाम में कुल 155 अभ्यर्थियों का चयन अनारक्षित श्रेणी में हुआ. सोशल मीडिया पर इसी आंकड़े को आधार बनाकर दावा किया गया कि इनमें से 128 अभ्यर्थी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से हैं. लेकिन जानकारी के मुताबिक 155 में 63 अभ्यर्थी आरक्षित वर्गों से हैं, जिन्हें अधिक अंक और बेहतर मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीटों पर चयन मिला.
इसके बाद अनारक्षित श्रेणी के 92 अभ्यर्थी बचते हैं. यानी 155 को सीधे 'सामान्य वर्ग के 155 अभ्यर्थी' मान लेना सही तस्वीर नहीं देता. 92 में 41 बाहर के, लेकिन दिल्ली-हरियाणा-राजस्थान से सिर्फ 7
92 अनारक्षित अभ्यर्थियों के गृह राज्य का जो आंकड़ा दिया गया है, उसमें 41 अभ्यर्थी झारखंड के बाहर के राज्यों से हैं.
राज्यवार तस्वीर देखें तो:
बिहार - 27
उत्तर प्रदेश - 6
दिल्ली - 4
हरियाणा - 2
राजस्थान - 1
पश्चिम बंगाल - 1
कुल = 41
अब सिर्फ उन तीन राज्यों को देखें जिनका नाम सोशल मीडिया के दावे में प्रमुखता से लिया गया - दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान.
दिल्ली से 4, हरियाणा से 2 और राजस्थान से 1.
यानी कुल 7 अभ्यर्थी.
यहीं 128 वाले दावे की सबसे बड़ी पड़ताल सामने आती है. 128 नहीं, दिल्ली-हरियाणा-राजस्थान से केवल 7 अभ्यर्थी हैं.
तो क्या JPSC में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी नहीं हैं?
ऐसा कहना भी सही नहीं होगा. दस्तावेज के अनुसार 92 अनारक्षित अभ्यर्थियों में 41 का गृह राज्य झारखंड से बाहर है. यानी बाहरी राज्यों से चयन का मुद्दा पूरी तरह गलत नहीं है. फर्क सिर्फ इतना है कि सोशल मीडिया पर जिस तरीके से 128 अभ्यर्थियों को दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से जोड़कर पेश किया गया, उपलब्ध आंकड़े उससे मेल नहीं खाते. सबसे ज्यादा 27 अभ्यर्थी बिहार से हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश से 6 अभ्यर्थी हैं.
यानी बाहर के राज्यों से चयनित अभ्यर्थियों में सबसे बड़ी संख्या बिहार की है, जबकि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त संख्या सिर्फ 7 है.
यूपी के 6 और बिहार के 27 अभ्यर्थियों पर भी सामने आई अहम जानकारी
हमारी पड़ताल में जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है वो काफी अहम है.
मसलन, उत्तर प्रदेश से जुड़े 6 अभ्यर्थियों में से 2 की पूरी शिक्षा झारखंड में हुई है. उनके परिवारों के पिछले करीब 15-20 वर्षों से झारखंड में रहने की जानकारी भी निकलकर सामने आ रही है. इसी तरह बिहार से जुड़े 27 अभ्यर्थियों में करीब 10 की शिक्षा झारखंड में हुई है. इसका मतलब यह है कि सिर्फ किसी अभ्यर्थी के 'गृह राज्य' को देखकर उसकी झारखंड से सामाजिक या शैक्षणिक जुड़ाव की पूरी तस्वीर तय नहीं की जा सकती.
63 आरक्षित अभ्यर्थियों का अनारक्षित सीट पर कैसे हुआ चयन?
JPSC के इस आंकड़े का एक और महत्वपूर्ण पहलू है. कुल 155 अनारक्षित सीटों में 63 अभ्यर्थी आरक्षित श्रेणी से हैं. इनका चयन आरक्षण के तहत नहीं, बल्कि बेहतर अंक और मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीटों पर हुआ. यानी अनारक्षित सीट का मतलब यह नहीं कि वहां केवल सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी ही चयनित हुए.
इसी JPSC में दो चयनित अभ्यर्थी UPSC में भी निकले
अब बवाल न्यूज दूसरा बड़ा खुलासा. 11वीं-13वीं JPSC में चयनित दो अभ्यर्थियों का मामला UPSC से जुड़ता है. JPSC की प्रारंभिक परीक्षा 17 मार्च 2024 को हुई थी और इसका अंतिम परिणाम 25 जुलाई 2025 को जारी किया गया. इसी दौरान दोनों अभ्यर्थी UPSC Civil Services Examination 2024 की प्रक्रिया में भी शामिल हुए.
जानकारी के अनुसार आर्यन का चयन UPSC के जरिए Indian Revenue Service (IRS) में हुआ, जबकि सुनील दास का चयन Indian Forest Service (IFS) में हुआ. यानी दोनों के सामने एक साथ दो अलग-अलग सेवाओं का रास्ता खुला-एक तरफ JPSC की राज्य सेवा और दूसरी तरफ UPSC की केंद्रीय सेवा. UPSC में बेहतर सेवा मिलने के बाद दोनों अभ्यर्थियों ने JPSC की आगे की नियुक्ति प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया.
जिसके बाद दोनों अभ्यर्थी Departmental Document Verification Process में शामिल नहीं हुए.इसके बाद उनकी JPSC से संबंधित नियुक्ति अनुशंसा रद्द कर दी गई. यहां एक अहम बात स्पष्ट है कि इस घटनाक्रम को सीधे किसी परीक्षा गड़बड़ी या अनियमितता से जोड़ना सही नहीं होगा. मामला मुख्य रूप से नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन में अनुपस्थिति से जुड़ा है. लेकिन इसे लेकर गड़बड़ी और अनियमीतता का दावे किये जा रहे थे.
आंदोलन के बीच सामने आया ये आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण?
11वीं-13वीं JPSC को लेकर झारखंड में पहले से ही माहौल गर्म है. छात्रों ने JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर लंबा आंदोलन किया. आंदोलन 26वें दिन 19 अगस्त को स्थगित हुआ. आंदोलन के दौरान छात्रों और सरकार के बीच बातचीत भी हुई थी, लेकिन छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए थे.
इसी बीच सरकार के फैसले से 11वीं-13वीं JPSC के 342 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में आ गईं. लेकिन 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसके तहत 11वीं-13वीं JPSC से हुई नियुक्तियां रद्द की गई थीं
11वीं-13वीं JPSC का विवाद पहले ही आंदोलन और अदालत तक पहुंच चुका है. अब चयन के आंकड़ों को लेकर सामने आई यह जानकारी बहस का एक नया पहलू खोलती है. एक तरफ 128 बाहरी अभ्यर्थियों का दावा है, दूसरी तरफ दस्तावेज में 41 बाहरी गृह राज्य वाले अभ्यर्थियों का आंकड़ा है. और इन 41 में भी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के सिर्फ 7 अभ्यर्थी हैं.
इसके अलावा इसी चयन प्रक्रिया में दो अभ्यर्थी ऐसे रहे, जो JPSC में चयन के बाद UPSC के जरिए IRS और IFS में पहुंच गए और JPSC की नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई. अब जब मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, तो आने वाले दिनों में चयन सूची, अभ्यर्थियों की पात्रता और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस और तेज होना तय है.

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