कोडरमा में मिड-डे मील के दौरान ढही स्कूल की छत, 35 बच्चे बाल-बाल बचे
कोडरमा के चंदवारा प्रखंड स्थित प्राथमिक मध्य विद्यालय वीरगढ़ा में बड़ा हादसा टल गया. मिड-डे मील के दौरान बरामदे में बैठे करीब 35 बच्चों के सामने दूसरी मंजिल की छत भरभराकर गिर गई. गनीमत रही कि किसी बच्चे को चोट नहीं लगी.

कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले में सोमवार को एक सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा होते-होते टल गया. चंदवारा प्रखंड के प्राथमिक मध्य विद्यालय वीरगढ़ा में मिड-डे मील के लिए करीब 35 बच्चे बरामदे में बैठे थे. इसी दौरान स्कूल की दूसरी मंजिल की छत अचानक भरभराकर पहली मंजिल पर जा गिरी. छत गिरने से पहले तेज आवाज हुई, जिसे सुनकर बच्चे घबरा गए और खाना छोड़कर सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे. राहत की बात यह रही कि हादसे के वक्त दूसरी मंजिल पर कोई बच्चा मौजूद नहीं था. इस वजह से किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. हालांकि, छत का मलबा पहली मंजिल तक पहुंचने से स्कूल भवन की स्थिति और भी खतरनाक हो गई है. घटना के बाद बच्चों, शिक्षक और ग्रामीणों में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा. अब जर्जर भवन को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.
तेज आवाज के बाद स्कूल में मची अफरातफरी
छत गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि स्कूल परिसर में मौजूद लोग सहम गए. मिड-डे मील कर रहे बच्चों ने जैसे ही आवाज सुनी, वे अपनी जगह से उठकर बाहर की तरफ भागने लगे. स्कूल के एकमात्र शिक्षक सह प्राचार्य पिंटू कुमार भी तुरंत बाहर निकले. उन्होंने देखा कि दूसरी मंजिल की छत टूटकर पहली मंजिल पर गिर चुकी थी. घटना के बाद कुछ समय तक स्कूल परिसर में डर का माहौल बना रहा.
दूसरी मंजिल की छत गिरने से पहली मंजिल भी क्षतिग्रस्त
शिक्षक पिंटू कुमार के अनुसार, दूसरी मंजिल की छत गिरने से पहली मंजिल को भी नुकसान पहुंचा है. उनका कहना है कि अगर पहली मंजिल की छत भी मलबे के साथ नीचे गिर जाती तो बरामदे में भोजन कर रहे बच्चों के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी. शिक्षक ने भवन की जर्जर हालत की जानकारी विभागीय अधिकारियों को पहले दिए जाने की बात कही है.
2008 में शुरू हुआ था निर्माण, अधूरा रह गया काम
स्कूल के शिक्षक के मुताबिक भवन का निर्माण वर्ष 2008 में शुरू हुआ था, लेकिन करीब दो साल बाद ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चला गया. बाद में दूसरी मंजिल की छत का निर्माण कराया गया, जिसकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे. शिक्षक का दावा है कि भवन की स्थिति के बारे में विभाग के जेई और अन्य संबंधित कर्मियों को कई बार जानकारी दी गई थी. निरीक्षण के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ.
हादसे के बाद ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
घटना के बाद ग्रामीणों ने स्कूल भवन की स्थिति को लेकर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि जर्जर भवन बच्चों के लिए खतरा बना हुआ था. ग्रामीणों ने पूरे भवन की तकनीकी जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते भवन की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था.
जर्जर भवन तोड़कर बनेगा नया स्कूल
जिला शिक्षा अधीक्षक अजय कुमार ने घटना की जानकारी मिलने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि जर्जर विद्यालय भवन को ध्वस्त करने के लिए आदेश की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. विभाग जिले के अन्य जर्जर स्कूल भवनों को भी चिह्नित कर कार्रवाई कर रहा है. प्राथमिक मध्य विद्यालय वीरगढ़ा के पुराने भवन को हटाने के बाद नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है.

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