कौन हैं अरूप रॉय, जिन्हें बागी गुट ने ममता बनर्जी की जगह TMC का अध्यक्ष घोषित किया?
TMC में बगावत के बाद अरूप रॉय को बागी गुट ने नया अध्यक्ष घोषित किया है। जानिए कौन हैं अरूप रॉय, उनका राजनीतिक सफर, मंत्री पद और बंगाल की राजनीति में उनकी भूमिका।

West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद बड़ा सियासी भूचाल आ गया है. पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही असंतोष की राजनीति अब खुलकर सामने आ गई है. TMC के बागी विधायकों और नेताओं ने अलग बैठक कर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया है. बागी खेमे की अगुवाई कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया है. इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और TMC के भीतर नेतृत्व को लेकर संघर्ष खुलकर सामने आ गया है. एक समय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले अरूप रॉय अब बागी गुट का चेहरा बनकर उभरे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अरूप रॉय कौन हैं और बंगाल की राजनीति में उनकी क्या पहचान रही है?
छात्र राजनीति से शुरू हुआ अरूप रॉय का सफर
अरूप रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं. उनका जन्म 16 अक्टूबर 1956 को हावड़ा में हुआ था. पेशे से वकील रहे अरूप रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी. शुरुआती दौर में वह कांग्रेस की छात्र इकाई से जुड़े रहे और संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे. 1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की, तब अरूप रॉय उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने शुरुआत से ही उनका साथ दिया. हावड़ा और आसपास के क्षेत्रों में TMC को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. संगठन पर मजबूत पकड़ और जमीनी स्तर पर सक्रियता के कारण वह जल्द ही ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए. यही वजह रही कि पार्टी के विस्तार और चुनावी रणनीतियों में उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं.
चार बार विधायक और कई बार मंत्री रह चुके हैं अरूप रॉय
अरूप रॉय की राजनीतिक ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह हावड़ा मध्य विधानसभा सीट से लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं. उन्होंने 2011, 2016, 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की. 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों के वाम शासन का अंत होने के बाद बनी ममता बनर्जी सरकार में उन्हें कृषि विपणन मंत्री बनाया गया था. इसके बाद भी वे अलग-अलग विभागों में मंत्री पद संभालते रहे. सहकारिता विभाग समेत कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई. सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अरूप रॉय की पहचान केवल एक विधायक या मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत संगठनकर्ता के रूप में भी रही है. यही कारण है कि हावड़ा जिले में उनका प्रभाव आज भी काफी मजबूत माना जाता है.
हावड़ा की राजनीति के ‘संकटमोचक’ माने जाते हैं अरूप रॉय
अरूप रॉय को हावड़ा जिले में TMC का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है. लंबे समय तक उन्होंने जिले के अध्यक्ष के रूप में काम किया और स्थानीय राजनीति में पार्टी को संगठित रखने का प्रयास किया. गुटबाजी और आंतरिक विवादों को सुलझाने की क्षमता के कारण उन्हें अक्सर पार्टी का ‘संकटमोचक’ कहा जाता था. उनकी सबसे बड़ी ताकत आम लोगों से सीधा जुड़ाव और क्षेत्र में लगातार मौजूदगी रही है. स्थानीय जनता के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो आसानी से लोगों की समस्याएं सुनते हैं और समाधान के लिए उपलब्ध रहते हैं. यही वजह है कि हावड़ा में उनकी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत बनी रही. पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच भी उनकी स्वीकार्यता काफी अधिक रही है, जिसके चलते संगठन में उन्हें हमेशा एक प्रभावशाली नेता के तौर पर देखा गया.
बागी गुट ने सौंपी TMC की कमान
TMC में बढ़ते असंतोष के बीच बागी विधायकों और नेताओं ने कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में बैठक कर नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया. इस बैठक में कई वरिष्ठ नेता, विधायक और पार्षद शामिल हुए. बैठक के बाद अरूप रॉय को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया. उनके नेतृत्व में 30 सदस्यीय नई कार्यसमिति का गठन किया गया है. साथ ही, फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष बनाया गया है. ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. बागी गुट ने दावा किया है कि यह पूरा कदम पार्टी संविधान के अनुरूप उठाया गया है और इसकी जानकारी चुनाव आयोग को भी दी जाएगी. इस फैसले ने TMC के भीतर सत्ता और संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई को और तेज कर दिया है.
ममता के करीबी से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनने तक का सफर
अरूप रॉय लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते रहे हैं. उन्होंने TMC के शुरुआती संघर्ष के दौर से लेकर सत्ता तक पहुंचने की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी के भीतर पैदा हुए संकट ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं. अब वही अरूप रॉय बागी गुट के सबसे बड़े चेहरे बनकर सामने आए हैं और ममता बनर्जी की जगह पार्टी अध्यक्ष घोषित किए गए हैं. बागी गुट ने जहां अभिषेक बनर्जी को महासचिव पद से निलंबित करने का फैसला लिया है, वहीं ममता बनर्जी को मुख्य सलाहकार बनने का प्रस्ताव भी दिया है. हालांकि, TMC का आधिकारिक नेतृत्व इस फैसले को स्वीकार करता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा. फिलहाल अरूप रॉय का नाम बंगाल की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है.

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