दुमका में ग्राम प्रधानों का धरना: लंबित सम्मान राशि और पेशा एक्ट संशोधन को लेकर सरकार पर दबाव
“दुमका में ग्राम प्रधानों और मांझी संगठन ने लंबित सम्मान राशि और पेशा एक्ट को लेकर धरना दिया. संथाल परगना से पहुंचे ग्रामीणों ने 11 सूत्री मांगें सरकार को सौंपीं और PESA Act 2025 को निरस्त करने की मांग की. आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.”

Dumka: झारखंड की उपराजधानी दुमका में ग्राम प्रधानों और मांझी संगठन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना दिया. इस धरने में पूरे संथाल परगना प्रमंडल से ग्राम प्रधान, लेखा होड, प्राणिक, नायकी और अन्य ग्रामीण शामिल हुए. धरने के दौरान उन्होंने अपनी ग्यारह सूत्री मांगें उपायुक्त के माध्यम से सरकार को सौंपीं. ग्राम प्रधानों का आरोप है कि वर्तमान सरकार में प्रधानी व्यवस्था कमजोर हो गई है और सम्मान राशि कई महीनों से नहीं दी जा रही है.
धरना पुराने समाहरणालय परिसर में आयोजित किया गया. इसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 की ग्राम प्रधान और अन्य कर्मियों की लंबित सम्मान राशि की मांग प्रमुख रही. इसके अलावा कई मौजा में रिक्त ग्राम प्रधान और लेखा होड पदों को भरा जाना भी प्रमुख मुद्दा था. ग्राम प्रधानों ने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा लाया गया पेशा एक्ट 2025 निरस्त किया जाए और 1996 के मूल प्रावधानों के अनुसार इसे लागू किया जाए. साथ ही राजस्व ग्राम को इकाई मानकर ग्राम प्रधानों को ग्राम सभा की अध्यक्षता और वित्तीय अधिकार दिए जाने की मांग की गई.
धरने के दौरान प्रमंडलीय अध्यक्ष ने कहा कि संथाल परगना में बंदोबस्त विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने इस जांच के लिए ईडी या सीबीआई की भूमिका मांगी. भीम मंडल ने 1932 के गेंजर सेटलमेंट खतियान के आधार पर स्थानीय नीति और नियोजन नीति लागू करने की भी मांग की, ताकि मूल रैयत को अधिकार मिल सके.
ग्राम प्रधानों ने कहा कि पहले प्रधानी प्रथा मजबूत थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे कमजोर कर दिया है. सम्मान राशि न मिलने और पंचायत व्यवस्था में अंतराल की वजह से गांव और सरकार के बीच कड़ी कमजोर हो रही है. यह आंदोलन 2011 से लगातार चल रहा है और अब यह देखना बाकी है कि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करती है या नहीं. ग्राम प्रधानों ने कहा कि बिना उनकी सहमति कोई भी निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए, लेकिन हाल की स्थिति दिखाती है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है.

