J-TET भाषा विवाद पर मंत्री समूह में नहीं बनी सहमति, 4 बनाम 3 के समीकरण के बीच अब CM हेमंत सोरेन करेंगे अंतिम फैसला
झारखंड में J-TET भाषा विवाद पर गठित मंत्री समूह की अहम बैठक मंगलवार को भी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने के मुद्दे पर मंत्रियों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई.

Ranchi: झारखंड में J-TET भाषा विवाद पर गठित मंत्री समूह की अहम बैठक मंगलवार को भी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने के मुद्दे पर मंत्रियों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई. अब इस पूरे मामले में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है. बैठक में समिति के सभी सात सदस्य मंत्री शामिल हुए. इनमें राधाकृष्ण किशोर, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, योगेंद्र प्रसाद, शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन मौजूद थे.
नए मंत्रियों की एंट्री के बाद बदला समीकरण
भाषा विवाद को लेकर पहले से गठित समिति में हाल ही में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को शामिल किया गया था. बैठक में दोनों मंत्रियों ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने का विरोध किया. सूत्रों के अनुसार, बैठक में इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष और विपक्ष में विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन समिति किसी एक राय पर नहीं पहुंच सकी.
राधाकृष्ण किशोर बोले- संख्या नहीं, जनहित के आधार पर हो फैसला
बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अब यह मामला मुख्यमंत्री के समक्ष जाएगा और अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है. उन्होंने कहा कि केवल संख्या बल के आधार पर निर्णय नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री को समर्थन और विरोध दोनों पक्षों के तर्कों का आकलन करते हुए जनहित में फैसला लेना चाहिए.
हिंदी को द्वितीय भाषा बनाने का दिया सुझाव
बैठक के दौरान राधाकृष्ण किशोर ने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी रखा. उन्होंने कहा कि जिन जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका बोली जाती है, वहां के छात्रों के हितों को देखते हुए हिंदी को द्वितीय भाषा के रूप में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि इससे क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर चल रहा विवाद काफी हद तक समाप्त हो सकता है और संबंधित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी अवसर मिल सकेगा.
जनजातीय भाषाओं के संरक्षण पर भी जोर
बैठक में कई मंत्रियों ने झारखंड की जनजातीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके अस्तित्व के महत्व को प्रमुखता से रखा. इस मुद्दे पर किसी मंत्री ने असहमति नहीं जताई. हालांकि विवाद इस बात को लेकर बना रहा कि भोजपुरी, मगही और अंगिका को भी क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल किया जाए या नहीं.
कांग्रेस के भीतर भी दिखी अलग-अलग राय
इस पूरे विवाद में कांग्रेस के भीतर भी अलग-अलग मत सामने आए हैं. एक ओर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने के पक्ष में दिखाई दिए, वहीं कांग्रेस की ही मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इन भाषाओं को सूची में शामिल करने का विरोध किया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला अब केवल भाषा या शिक्षा नीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड की पहचान, स्थानीयता और राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़ चुका है.
अब क्या होगा?
मंत्री समूह अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपेगा. इसके बाद मुख्यमंत्री सभी पक्षों के तर्कों और समिति की अनुशंसाओं पर विचार कर अंतिम फैसला लेंगे. फिलहाल J-TET भाषा विवाद का समाधान मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिका हुआ है और लाखों अभ्यर्थियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भी नजर अब इसी फैसले पर है.

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