सुदिव्य की सीट, श्वेता की सक्रियता और JMM की रणनीति… गिरिडीह में क्या पक रहा है?
“सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह की राजनीति में JMM के भीतर उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा तेज हो गई है. उनकी पत्नी श्वेता शर्मा की पार्टी बैठकों और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय मौजूदगी ने संभावित उपचुनाव को लेकर अटकलें बढ़ा दी हैं.”

Ranchi: 6 सितंबर को सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह की राजनीति में खाली हुई कुर्सी अब सिर्फ एक विधानसभा सीट का सवाल नहीं रह गई है. JMM के भीतर सुदिव्य की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाला चेहरा कौन होगा, इस पर चर्चा तेज है. इसी बीच उनकी पत्नी श्वेता शर्मा का JMM की बैठक में पहुंचना और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय होना नई सियासी अटकलों का आधार बन गया है. श्वेता ने कार्यकर्ताओं से कहा कि “जैसे वो करते थे, वैसे ही अब हम करेंगे” और वह हमेशा उनके बीच रहने की बात भी कही.
सुदिव्य की विरासत, श्वेता की सक्रियता
सुदिव्य सोनू गिरिडीह से लगातार दो बार विधायक रहे और हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. पार्टी संगठन और सरकार के भीतर उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उनकी राजनीतिक विरासत महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसे में उनके निधन के बाद श्वेता शर्मा का सीधे कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचना महज पारिवारिक उपस्थिति से आगे का संकेत माना जा रहा है.
उपचुनाव से पहले क्या JMM कर रही है तैयारी?
गिरिडीह सीट पर उपचुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है और JMM ने उम्मीदवार का ऐलान भी नहीं किया है. इसके बावजूद श्वेता की पार्टी बैठकों में मौजूदगी ने संभावित प्रत्याशी को लेकर चर्चा को तेज किया है. खास बात यह है कि श्वेता खुद कार्यकर्ताओं से जुड़ने और सुदिव्य की तरह काम करने की बात कर रही हैं. यही वजह है कि अब उनकी सक्रियता को उपचुनाव के संभावित राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
खाली मंत्री पद भी बढ़ा रहा सवाल
सुदिव्य सोनू के निधन के बाद मंत्रिमंडल में भी एक पद खाली हुआ है और उनके विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास हैं. इसी वजह से श्वेता को लेकर चर्चा सिर्फ विधानसभा उपचुनाव तक सीमित नहीं है. हालांकि मंत्री पद को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है.
फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है. लेकिन तीन तथ्य सामने हैं—गिरिडीह की सीट खाली है, JMM को उपचुनाव के लिए चेहरा तय करना है और श्वेता शर्मा संगठन के बीच सक्रिय दिखाई दे रही हैं. ऐसे में असली सवाल यही है कि यह सक्रियता सिर्फ सुदिव्य की विरासत को संभालने की शुरुआत है, या आने वाले उपचुनाव के लिए JMM की संभावित रणनीति का पहला सार्वजनिक संकेत.

