बेटे की मौत, आरोपी नाबालिग को बेल—दिल्ली के द्वारका हादसे ने खड़े किए बड़े सवाल
द्वारका में हुए सड़क हादसे में 23 वर्षीय युवक साहिल की मौत के बाद अब न्याय को लेकर बहस तेज हो गई है. आरोप है कि एक नाबालिग द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार कार ने उसकी बाइक को टक्कर मारी, जिससे उसकी जान चली गई. इस मामले में आरोपी को जुवेनाइल कानून के तहत राहत मिलने पर परिवार ने नाराजगी जताई है.

New Delhi: दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक बार फिर देश में नाबालिग ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 23 वर्षीय युवक साहिल की मौत उस वक्त हो गई जब कथित तौर पर एक नाबालिग द्वारा चलाई जा रही कार ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी. हादसे के बाद आरोपी को जुवेनाइल कानून के तहत राहत मिलने से पीड़ित परिवार में गहरा आक्रोश है. साहिल की मां अब न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं और उनका कहना है कि उनके बेटे की जान लेने वाले को सख्त सजा मिलनी चाहिए. इस घटना ने न सिर्फ कानून की व्यवस्था बल्कि जिम्मेदार अभिभावकों की भूमिका पर भी बहस छेड़ दी है. परिवार और स्थानीय लोग लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं.
हादसा और मौत: एक परिवार की दुनिया उजड़ गई
द्वारका में हुए इस सड़क हादसे में साहिल अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी तेज रफ्तार कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी. बताया जा रहा है कि कार एक नाबालिग चला रहा था और हादसे के वक्त लापरवाही सामने आई. टक्कर इतनी भीषण थी कि साहिल को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया. साहिल परिवार का इकलौता सहारा था. उसकी मौत से घर में मातम पसरा है. पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने भी इस हादसे पर गहरा दुख जताया और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
जुवेनाइल कानून और बेल पर विवाद
इस मामले में सबसे ज्यादा विवाद तब हुआ जब आरोपी नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत राहत मिल गई. पीड़ित परिवार का कहना है कि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद आरोपी को आसानी से जमानत मिलना न्याय के साथ अन्याय है. साहिल की मां का आरोप है कि कानून का गलत फायदा उठाया जा रहा है और इससे गलत संदेश जाएगा. उनका कहना है कि अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे मामलों में बढ़ोतरी होगी और लोगों का कानून से भरोसा उठ जाएगा.
मां की लड़ाई: “मेरे बेटे के लिए इंसाफ चाहिए”
साहिल की मां अब अपने बेटे के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं. उन्होंने प्रशासन और न्याय व्यवस्था से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और आरोपी को कड़ी सजा दी जाए. उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका बेटा वापस नहीं आ सकता, लेकिन अगर दोषी को सजा मिलती है तो शायद किसी और मां का घर उजड़ने से बच सकता है. इस केस ने पूरे इलाके में गुस्सा और चिंता दोनों पैदा कर दी है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक नाबालिग ड्राइविंग और सड़क पर लापरवाही ऐसे ही जान लेती रहेगी.

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