AI Impact Summit में भारी मिसमैनेजमेंट, Mallikarjun Kharge बोले– PR स्टंट ने देश की कराई किरकिरी
“AI Impact Summit में कथित मिसमैनेजमेंट को लेकर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अव्यवस्था और कमजोर तैयारियों के कारण अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की किरकिरी हुई है.”

New Delhi: नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में अव्यवस्थाओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस ने कार्यक्रम के प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे भारत की छवि के लिए नुकसानदेह बताया है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि वैश्विक स्तर के इस आयोजन में मूलभूत सुविधाओं की कमी, सुरक्षा खामियां और व्यवस्थागत लापरवाही देखने को मिली. वहीं सरकार समर्थक पक्ष इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने का आरोप लगा रहा है. इस बीच आयोजकों ने कुछ शिकायतों को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है. समिट में देश-विदेश की टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया, लेकिन शुरुआती दिन से ही व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष की खबरें सामने आती रहीं. पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है.
प्रदर्शकों की परेशानी और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
कांग्रेस के मुताबिक समिट में शामिल कई प्रदर्शकों ने भोजन, पानी और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत की. पार्टी का कहना है कि बड़े स्तर पर शुल्क देने के बावजूद उन्हें अपेक्षित व्यवस्थाएं नहीं मिलीं. कुछ प्रतिभागियों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थल पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लैपटॉप और निजी सामान ले जाने पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए, जिससे कामकाज प्रभावित हुआ. कई प्रदर्शकों ने सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें साझा करते हुए कहा कि डिजिटल और एआई केंद्रित कार्यक्रम में भी भुगतान के लिए यूपीआई जैसी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं और नकद भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही थी. आयोजकों की ओर से बाद में बयान जारी कर कहा गया कि पहले दिन भीड़ और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण असुविधा हुई, जिसे अगले सत्रों में सुधारा गया.
चोरी की शिकायतों पर विवाद
समिट के दौरान सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे. कांग्रेस ने दावा किया कि कई प्रदर्शकों के उपकरण और बैग चोरी होने की घटनाएं सामने आईं, जिससे प्रतिभागियों में असुरक्षा की भावना बनी. पार्टी ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में इस तरह की घटनाएं गंभीर लापरवाही का संकेत हैं. दूसरी ओर आयोजकों ने कहा कि कुछ मामलों में शिकायतें मिली हैं और उन्हें स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर देखा जा रहा है. कार्यक्रम स्थल पर अतिरिक्त सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ाने का भी दावा किया गया. हालांकि विपक्ष का कहना है कि शुरुआत में ही बेहतर योजना और नियंत्रण होता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती. यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सरकार की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने पूरे मामले को केंद्र सरकार की “पीआर केंद्रित नीति” का परिणाम बताया और कहा कि फोटो-ऑप और औपचारिक कार्यक्रमों के कारण प्रतिभागियों को परेशानी हुई. पार्टी ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने देश की छवि को नुकसान पहुंचा है. वहीं सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि समिट में रिकॉर्ड भागीदारी हुई और कुछ शुरुआती दिक्कतों को तुरंत ठीक किया गया. सरकार के समर्थकों का कहना है कि विपक्ष कार्यक्रम की सफलता को नजरअंदाज कर केवल नकारात्मक घटनाओं को उभार रहा है. इस बीच कार्यक्रम से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दूसरे दिन से व्यवस्थाओं में सुधार किया गया और प्रतिभागियों की शिकायतों का समाधान करने के लिए हेल्पडेस्क और सपोर्ट टीम बढ़ाई गई.
अन्य टेक समिट्स से तुलना
कांग्रेस ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को बड़े तकनीकी आयोजनों के प्रबंधन के लिए बेंगलुरु टेक समिट जैसे कार्यक्रमों से सीख लेनी चाहिए, जहां हर साल बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी सम्मेलन अपेक्षाकृत सुचारू रूप से आयोजित होते हैं. पार्टी ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो. दूसरी ओर आयोजकों ने कहा कि समिट के शेष दिनों में बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट, खानपान व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए गए हैं. कार्यक्रम के समापन के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर भविष्य के आयोजनों के लिए दिशानिर्देश बनाए जाने की भी बात कही गई है. फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है.


