समीर कुमार
Ranchi: लोकसभा सत्र के दौरान केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलकर वीबीजी राम जी योजना किए जाने के फैसले ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है. कांग्रेस ने इस फैसले को गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताया है. इसी के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है, जिसकी शुरुआत “मनरेगा बचाओ संग्राम” के रूप में सोमवार को राजधानी रांची से की गई. राजधानी में कांग्रेस की ओर से भव्य पैदल मार्च और आक्रोश रैली निकाली गई, जिसमें प्रदेश नेतृत्व से लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. मोरहाबादी मैदान से लेकर लोक भवन तक निकाले गए इस मार्च ने पूरे शहर का राजनीतिक माहौल गरमा दिया.
मोरहाबादी मैदान से लोक भवन तक निकला आक्रोश मार्च
मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में एकत्र हुए. यहां से बापू वाटिका होते हुए लोक भवन तक पैदल मार्च निकाला गया. मार्च के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और हाथों में तख्तियां लेकर कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की. इस मार्च में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और संगठन के वरिष्ठ नेता शामिल रहे. लोक भवन पहुंचने के बाद धरना-प्रदर्शन का आयोजन भी किया गया, जहां नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला.
महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष दिलाई गई शपथ
आंदोलन की शुरुआत से पहले बापू वाटिका में स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस नेताओं ने माल्यार्पण किया. प्रदेश प्रभारी के. राजू की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनरेगा को बचाने की शपथ दिलाई. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा कांग्रेस शासनकाल की ऐतिहासिक योजना है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया और करोड़ों मजदूरों को रोजगार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नाम बदलकर इस योजना की आत्मा को कमजोर करना चाहती है, जिसे कांग्रेस किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देगी.
केंद्र सरकार सिर्फ नाम बदलने की राजनीति कर रही: के. राजू
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को न तो रोजगार से मतलब है और न ही ग्रामीण विकास से. सरकार सिर्फ योजनाओं के नाम बदलने की राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनरेखा है और इसका नाम बदलना गरीबों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है. कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी और जनता को इसके दुष्परिणामों से अवगत कराएगी.
राम के नाम पर राजनीति कर रही बीजेपी: सुखदेव भगत
लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने भी योजना का नाम बदलने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ राम के नाम पर राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस राम को आस्था और विश्वास से मानती है. उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को सच में भगवान राम का सम्मान करना था, तो उनके नाम पर कोई नई योजना शुरू करती. मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना का नाम बदलना गरीबों की भावनाओं के साथ छल है.
राज्य सरकार पर डाला गया आर्थिक बोझ: दीपिका पांडेय
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सिर्फ नाम ही नहीं बदला गया है, बल्कि योजना की संरचना में बदलाव कर राज्य सरकार पर आर्थिक बोझ डाल दिया गया है. उन्होंने बताया कि पहले मनरेगा पूरी तरह केंद्र सरकार की योजना थी, लेकिन अब वीबीजी राम जी योजना के तहत 60:40 का फार्मूला लागू किया गया है, जिसमें 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार को उठाना होगा. यह राज्यों के साथ अन्याय है.
देवी-देवताओं के नाम पर माहौल बना रही बीजेपी
सांसद कालीचरण मुंडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बालमुचू ने कहा कि भाजपा देवी-देवताओं के नाम पर राजनीतिक माहौल बनाने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि जनता अब सब समझ रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी. मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश गरीब विरोधी मानसिकता को दर्शाती है.
महिला नेत्रियों ने संभाली रैली की कमान, दिखा मजबूत नेतृत्व
इस पूरे आंदोलन का सबसे अहम और प्रभावशाली पहलू यह रहा कि रैली की कमान महिला नेत्रियों के हाथों में रही. मोरहाबादी मैदान के बापू वाटिका से निकली रैली में सबसे आगे महिला नेता चलती नजर आईं. झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की महिला कार्यकर्ताओं के साथ मार्च का नेतृत्व कर रही थीं. उनके पीछे प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, उप प्रभारी, पूर्व मंत्री, सांसद और विधायक कतारबद्ध नजर आए. महिला नेत्रियों की अगुवाई ने इस आंदोलन को नई ऊर्जा दी और यह संदेश दिया कि मनरेगा बचाने की लड़ाई में महिलाएं सबसे आगे हैं. यह रैली कांग्रेस के संगठनात्मक शक्ति और सामाजिक प्रतिबद्धता का मजबूत प्रदर्शन बनकर सामने आई.


