बिहार में 50-50 फॉर्मूला तय: 7 मई को गांधी मैदान में सम्राट कैबिनेट का विस्तार
“बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है, जहां सत्ता संतुलन और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़े फैसले सामने आ रहे हैं. सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार अब विस्तार के चरण में पहुंच चुकी है और 7 मई को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी शुरू हो गई है. ”

Patna: बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है, जहां सत्ता संतुलन और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़े फैसले सामने आ रहे हैं. सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार अब विस्तार के चरण में पहुंच चुकी है और 7 मई को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी शुरू हो गई है. एनडीए के भीतर 50-50 फॉर्मूले के तहत सत्ता का बंटवारा होने की चर्चा है, जिससे भाजपा और जदयू के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई जा रही है. दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बाद अब मंत्रियों के नामों को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें तेज हैं. इस विस्तार के जरिए सरकार प्रशासनिक मजबूती और राजनीतिक संतुलन दोनों को साधने की कोशिश में है.
गांधी मैदान में शपथ की तैयारी
पटना के गांधी मैदान में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं. 7 मई को यहां नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. इस दौरान सय्यद अता हसनैन मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे. यह समारोह राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे नई सरकार का पूर्ण स्वरूप सामने आएगा. सुरक्षा, मंच और आमंत्रण व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सके.
दिल्ली बैठक के बाद तेज हुई प्रक्रिया
हाल ही में सम्राट चौधरी ने दिल्ली में अमित शाह और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी. इसके साथ ही उन्होंने एनडीए सहयोगियों जैसे राजीव रंजन सिंह, जीतन राम मांझी और चिराग पासवान से भी चर्चा की. इन बैठकों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया. माना जा रहा है कि इस दौरान विभागों के बंटवारे और राजनीतिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया.
50-50 फॉर्मूले पर बनेगी सरकार
एनडीए सूत्रों के अनुसार, बिहार में इस बार मंत्रिमंडल गठन 50-50 फॉर्मूले पर आधारित होगा. भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के बीच बराबरी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा. बताया जा रहा है कि दोनों दलों के लगभग समान संख्या में मंत्री होंगे. इसके अलावा सहयोगी दलों को भी सीमित लेकिन अहम भागीदारी दी जाएगी. यह रणनीति गठबंधन में संतुलन बनाए रखने और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
खाली पदों को भरा जाएगा
फिलहाल बिहार मंत्रिमंडल में कई पद खाली हैं, जिन्हें इस विस्तार में भरा जाएगा. जानकारी के अनुसार, करीब 33 पद लंबे समय से रिक्त हैं. पहले चरण में विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव को शपथ दिलाई गई थी. अब बाकी पदों पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है. हालांकि कुछ पद भविष्य की राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खाली भी रखे जा सकते हैं. इससे सरकार को आगे चलकर फेरबदल करने में लचीलापन मिलेगा.
नीतीश कुमार से मुलाकात के मायने
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार से मुलाकात की, जिसे काफी अहम माना जा रहा है. यह बैठक दिल्ली से मिले निर्देशों और रणनीति को साझा करने के लिए हुई बताई जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस मुलाकात से गठबंधन के भीतर समन्वय और स्पष्टता बढ़ेगी. साथ ही यह संकेत भी देता है कि सरकार गठन और विस्तार के हर कदम को सोच-समझकर और आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा रहा है.


