विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा, सलमान खुर्शीद को नहीं मिली दलील रखने की इजाजत, कांग्रेस ने जताई नाराजगी
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा परिसर तक पहुंच गया है.

Ranchi: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा परिसर तक पहुंच गया है. कांग्रेस नेताओं ने नामांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई है. इसी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद रांची पहुंचे थे. हालांकि उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई. विधानसभा परिसर में कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों ने विरोध प्रदर्शन किया और पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए. इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है.
सलमान खुर्शीद को सुनवाई में शामिल नहीं किए जाने पर नाराजगी
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान परिमल नाथवानी के नामांकन पर आपत्तियों की सुनवाई की जा रही थी. कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद रांची पहुंचे थे ताकि पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा जा सके. लेकिन कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी दलील रखने की अनुमति नहीं दी गई. इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए था.
विधानसभा परिसर में कांग्रेस नेताओं का विरोध
सुनवाई प्रक्रिया को लेकर असंतोष के बाद कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस कोटे के कई मंत्रियों और नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के बाहर विरोध दर्ज कराया. उनका कहना था कि नामांकन से जुड़े कुछ दस्तावेज स्वीकार किए गए, लेकिन उनकी ओर से प्रस्तुत कानूनी पक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया. नेताओं ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की.
नामांकन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव तेज
कांग्रेस का आरोप है कि परिमल नाथवानी के नाम और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी विसंगतियों को लेकर उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया. वहीं, नाथवानी समर्थक पक्ष का कहना है कि सभी आवश्यक दस्तावेज नियमों के अनुरूप प्रस्तुत किए गए हैं. इस विवाद के बीच विधानसभा परिसर और उसके बाहर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. राज्यसभा चुनाव से जुड़ा यह मामला अब केवल नामांकन की तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिष्ठा और चुनावी पारदर्शिता की बहस का विषय बनता जा रहा है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है.



