रिम्स में बिना स्वीकृति टेंडर पर सख्ती, 1 करोड़ से अधिक की निविदाओं की होगी जांच
रिम्स में बिना स्वीकृति 1 करोड़ रुपये से अधिक की निविदाएं जारी करने का मामला सामने आया है. सरकार ने इस पर सख्ती दिखाते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.

झारखंड के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थान Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स) में वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है. स्थायी वित्त एवं लेखा समिति की बैठक में यह मामला सामने आया कि एक करोड़ रुपये से अधिक की कुछ निविदाएं बिना आवश्यक स्वीकृति के जारी कर दी गईं. इस पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का निर्णय लिया है. बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने की, जिसमें संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि शामिल हुए. चर्चा के दौरान पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वित्तीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों के विरुद्ध उठाए गए हर कदम की जांच होगी.
बिना स्वीकृति टेंडर पर जांच के आदेश
बैठक में उन निविदाओं पर विशेष चर्चा हुई, जिनके लिए स्टेट फाइनेंस कमेटी (SFC) की मंजूरी जरूरी थी, लेकिन इसके बिना ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. इस पर समिति ने नाराजगी जताते हुए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए. एक विशेष जांच कमेटी गठित की जाएगी, जो पूरे मामले की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में बिना स्वीकृति कोई भी वित्तीय प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी.
कॉस्ट डिटेल नहीं देने पर नाराजगी
चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े मामलों में जब समिति ने लागत का विवरण मांगा, तो रिम्स प्रबंधन इसे उपलब्ध नहीं करा सका. इस पर अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि बिना कॉस्ट डिटेल के किसी भी खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाना नियमों के खिलाफ है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पर्याप्त जानकारी के बिना इतनी बड़ी राशि के टेंडर कैसे जारी किए गए.
विकास योजनाओं और सुधारों पर फोकस
बैठक में रिम्स के विकास से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गए. नए हॉस्टलों को 12 मंजिला बनाने, पुराने हॉस्टलों के नवीनीकरण और पीपीपी मॉडल पर सुविधाओं के विस्तार पर विचार किया गया. साथ ही संस्थान को तीन महीने के भीतर कैशलेस और पेपरलेस सिस्टम अपनाने का लक्ष्य दिया गया. चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के तहत रोबोटिक सर्जरी और जेनेटिक बीमारियों के इलाज को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही गई. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया.

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