Video: सवाल पूछा, ‘दलाल-चोर’ कहा और फिर पिटाई! मंत्री के सामने हजारीबाग में सत्ता बनाम सवाल का खुला टकराव
हजारीबाग में मंत्री के सामने पत्रकार से कथित मारपीट का मामला सामने आया है. चतरा हादसे पर सवाल पूछने के दौरान हंगामा हुआ, जिसमें पत्रकार को निशाना बनाए जाने के आरोप लगे हैं.


Hazaribag: हजारीबाग में जो कुछ हुआ, उसने सिर्फ एक पत्रकार पर हमले का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सबसे बुनियादी सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है—क्या अब सत्ता से सवाल पूछना भी खतरे से खाली नहीं रहा? चतरा विमान हादसे के पीड़ित परिवारों को अब तक मुआवजा न मिलने और एयरलाइन कंपनी पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर जब स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से सवाल पूछा गया, तो माहौल अचानक विस्फोटक हो गया. मंत्री के ठीक पास खड़े लोगों ने कैमरे के सामने पत्रकारों को “दलाल”, “चोर” और “मुद्दे से भटकाने वाला” कहना शुरू कर दिया. आरोप है कि इसी हंगामे के बीच पत्रकार सुशांत सोनी के साथ मारपीट की गई और उन्हें घायल हालत में अस्पताल पहुंचाना पड़ा. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुद्दा पीड़ित परिवारों का था, तो सत्ता के सामने खड़ा सवाल अचानक पत्रकार पर हमला कैसे बन गया?
चतरा हादसे से ध्यान भटकाने की कोशिश?
इस पूरे विवाद की जड़ चतरा एयर एंबुलेंस हादसा है. हादसे में जान गंवाने वालों के परिजन अब तक मुआवजा और जवाब मांग रहे हैं. मौके पर मौजूद पत्रकारों ने मंत्री से वही सवाल पूछा, जो पीड़ित परिवार पूछ रहा था—अब तक राहत क्यों नहीं मिली? लेकिन सवाल उठते ही पूरा फोकस अचानक बदल गया. जवाब देने के बजाय माहौल ऐसा बना दिया गया कि सवाल पूछने वाला ही कटघरे में आ गया. यही इस घटना का सबसे बड़ा राजनीतिक एंगल है—क्या असली मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए पत्रकार को निशाना बनाया गया?
मंत्री के पास खड़े लोग कौन थे?
घटना के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रही वह आवाज— “पत्रकार चोर है… ये लोग दलाल हैं…” यही लाइन अब पूरे विवाद की धुरी बन चुकी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंत्री के बिल्कुल पास खड़े ये लोग आखिर थे कौन? अगर ये सिर्फ समर्थक थे, तो सवाल पूछते ही इनका गुस्सा इतना हिंसक क्यों हो गया? राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, या सवाल दबाने के लिए मौजूद एक दबाव तंत्र? अगर मुद्दा पीड़ित परिवारों के इंसाफ का था, तो निशाने पर पत्रकार क्यों आया?
इरफान अंसारी और विवादों का पुराना पैटर्न
यह पहली बार नहीं है जब इरफान अंसारी विवादों में आए हों. उनके बयान, मीडिया से बहस और सार्वजनिक टकराव पहले भी सुर्खियों में रहे हैं. विपक्ष इस घटना को उसी पुराने पैटर्न से जोड़कर देख रहा है—जहां सवाल उठता है, वहां जवाब कम और टकराव ज्यादा दिखता है. यही वजह है कि अब यह मामला सिर्फ एक कथित मारपीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक व्यवहार और सत्ता के अहंकार की बहस का बन गया है.
बड़ा सवाल: क्या सवाल पूछना अब अपराध है?
लोकतंत्र में पत्रकार जनता की आवाज होता है. उसका काम ही सवाल पूछना है. अगर सवाल पूछने पर उसे “दलाल” कहा जाए, “चोर” कहा जाए और कथित तौर पर पीटा जाए, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि सवाल पूछने के अधिकार पर हमला माना जाएगा. अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या चतरा हादसे के पीड़ितों को जवाब मिलेगा? या फिर पूरा फोकस पत्रकार, हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप पर टिकाकर असली मुद्दा दबा दिया जाएगा?

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