रांची में शर्म की पराकाष्ठा: महिला को ‘सजा’ के नाम पर सरेआम जुलूस, कालिख पोतकर घुमाया
“रांची में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक महिला को कथित आरोपों के नाम पर बर्बरता का शिकार बनाया गया. सदर थाना क्षेत्र के भाभानगर में कुछ लोगों ने महिला के साथ पहले मारपीट की, फिर उसे चप्पलों की माला पहनाकर चेहरे पर कालिख पोत दी और पूरे मोहल्ले में घुमाया. ”

Ranchi: रांची में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक महिला को कथित आरोपों के नाम पर बर्बरता का शिकार बनाया गया. सदर थाना क्षेत्र के भाभानगर में कुछ लोगों ने महिला के साथ पहले मारपीट की, फिर उसे चप्पलों की माला पहनाकर चेहरे पर कालिख पोत दी और पूरे मोहल्ले में घुमाया. इस घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में बढ़ती भीड़ मानसिकता और महिला उत्पीड़न की गंभीर तस्वीर भी पेश की है. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तेजी दिखाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं को भी खंगाल रही है.
क्या है पूरा मामला
पीड़िता, जो खूंटी की रहने वाली है और फिलहाल रांची में किराए के मकान में रह रही थी, ने आरोप लगाया कि 29 मार्च को पंकज कुमार नामक व्यक्ति उसके घर पहुंचा. उसने गाली-गलौज करते हुए महिला को जबरन घर से बाहर खींच लिया. इसके बाद आरोपियों ने महिला और एक अन्य महिला के साथ मारपीट की. मामला यहीं नहीं रुका—उन्हें चप्पलों की माला पहनाई गई और चेहरे पर कालिख पोतकर पूरे मोहल्ले में घुमाया गया. पीड़िता के अनुसार, उसके बेटे और परिचितों पर बाइक चोरी का आरोप लगाकर यह पूरी घटना अंजाम दी गई. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उसके कपड़े फाड़े गए और गलत नीयत से पकड़ने की कोशिश भी की गई.
पुलिस का एक्शन और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की. थाना प्रभारी कुलदीप कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू की गई और मुख्य आरोपी पंकज कुमार सिंह उर्फ पंकज तथा सनताना कुमारी को गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. पुलिस का कहना है कि एफआईआर के आधार पर आगे की जांच जारी है और इस घटना में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है.
समाज पर सवाल और कानून की चुनौती
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज में कानून को हाथ में लेने की खतरनाक प्रवृत्ति को भी उजागर करती है. किसी आरोप के आधार पर इस तरह की सजा देना पूरी तरह गैरकानूनी है. महिला के साथ सार्वजनिक अपमान और हिंसा की यह घटना बताती है कि आज भी भीड़ न्याय (Mob Justice) जैसी सोच जिंदा है. ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और जागरूकता दोनों की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.

