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Home»झारखंड»राज्यसभा का रण: JMM में सोरेन परिवार, कांग्रेस में दिग्गजों की जंग; नाथवाणी फिर बनेंगे ‘डार्क हॉर्स’?
झारखंड

राज्यसभा का रण: JMM में सोरेन परिवार, कांग्रेस में दिग्गजों की जंग; नाथवाणी फिर बनेंगे ‘डार्क हॉर्स’?

“झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में दिख रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंदरखाने राजनीति चरम पर है. ”

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Satya MishraEditorial Desk
Published May 25, 2026 · 8:27 AM· 6 min read
राज्यसभा का रण: JMM में सोरेन परिवार, कांग्रेस में दिग्गजों की जंग; नाथवाणी फिर बनेंगे ‘डार्क हॉर्स’?

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में दिख रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंदरखाने राजनीति चरम पर है. जेएमएम में शिबू सोरेन परिवार से किसी सदस्य को राज्यसभा भेजने की चर्चा जोरों पर है, जबकि कांग्रेस में कई दिग्गज नेता दिल्ली से लेकर रांची तक लॉबिंग में जुटे हैं. दूसरी तरफ बीजेपी भी संख्या कम होने के बावजूद एक सीट पर प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की तैयारी में है. इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या गुरुजी के निधन से खाली हुई सीट पर सोरेन परिवार का कोई सदस्य जाएगा, या फिर गठबंधन राजनीति कोई नया समीकरण पैदा करेगी.

JMM में ‘गुरुजी परिवार’ सबसे बड़ा फैक्टर

यह भी पढ़ें:चुटूपालू-ओरमांझी में अवैध स्टोन क्रशरों पर बड़ा एक्शन, 19 पर कार्रवाई; 8 सील, 11 ध्वस्त

जेएमएम के अंदर यह भावना मजबूत है कि शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई सीट पर पहला अधिकार उनके परिवार का होना चाहिए. इसी वजह से पार्टी के भीतर अंजली सोरेन, लता सोरेन और कल्पना सोरेन के नाम चर्चा में हैं. हालांकि राजनीतिक और व्यावहारिक नजरिए से देखें तो कल्पना सोरेन का राज्यसभा जाना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वे अभी गांडेय से विधायक हैं और पार्टी ने उन्हें भविष्य के बड़े चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट किया है. ऐसे में JMM शायद उन्हें विधानसभा छोड़कर राज्यसभा भेजने का जोखिम नहीं लेना चाहेगी. यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा जरूर है, लेकिन उनकी वास्तविक संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है. ऐसे में सबसे ज्यादा दम अंजली सोरेन के नाम में दिख रहा है. वे फिलहाल किसी सदन की सदस्य नहीं हैं और अगर JMM भावनात्मक संदेश देना चाहती है तो “गुरुजी परिवार” के प्रतिनिधित्व के तौर पर उनका नाम सबसे स्वाभाविक माना जा रहा है. वहीं बसंत सोरेन की पत्नी लता सोरेन का नाम भी चर्चा में है, लेकिन संगठन और सार्वजनिक राजनीति में उनकी सक्रियता अभी सीमित रही है. इसलिए उनका दावा फिलहाल बैकअप विकल्प की तरह देखा जा रहा है.

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कांग्रेस में सबसे ज्यादा खींचतान

राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में सबसे ज्यादा अंदरूनी प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है. पार्टी के कई बड़े नेता इस बार राज्यसभा जाने की कोशिश में हैं और हर नाम अपने साथ अलग राजनीतिक संदेश लेकर आता है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है. संगठन में उनकी पकड़ मजबूत रही है और हेमंत सोरेन के साथ उनके अच्छे संबंध भी उनकी ताकत माने जा रहे हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद पार्टी में उनका कद बढ़ा है. संगठन को प्राथमिकता मिली तो राजेश ठाकुर सबसे आगे निकल सकते हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय का नाम वरिष्ठता के आधार पर चर्चा में जरूर है, लेकिन उम्र और हालिया चुनावी समीकरणों को देखते हुए उनकी राह आसान नहीं दिखती. कांग्रेस अब राज्य में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रही है.

धीरज प्रसाद साहू का नाम भी लगातार चर्चा में है. संसाधन, राजनीतिक नेटवर्क और दिल्ली में पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है. हालांकि विपक्ष उनके खिलाफ पहले से हमलावर रहा है, लेकिन कांग्रेस के भीतर उनका प्रभाव अभी भी कायम माना जाता है.

यह भी पढ़ें:तीनपहाड़ स्टेशन पर यात्रियों को बताया गया RailOne App का आसान तरीका

पूर्व सांसद प्रदीप बलमुचू भी सक्रिय हैं, लेकिन जेएमएम सरकार के खिलाफ उनकी लगातार बयानबाजी गठबंधन के भीतर उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. वहीं आलमगीर आलम और फुरकान अंसारी जैसे मुस्लिम चेहरों के नाम पर भी चर्चा है, लेकिन फिलहाल पार्टी बहुत बड़ा जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही.

नाथवाणी फिर बन सकते हैं ‘सरप्राइज फैक्टर’

राज्यसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प नाम उद्योगपति परिमल नाथवाणी का माना जा रहा है. वे पहले भी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और लगभग सभी दलों के नेताओं से उनके अच्छे संबंध रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक नाथवाणी एक बार फिर झारखंड से राज्यसभा जाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. चर्चा यह भी है कि वे खुद की जगह अपने बेटे को मैदान में उतार सकते हैं. हालांकि उनकी पूरी संभावना JMM और गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगी. अगर कांग्रेस और JMM के बीच सीट को लेकर टकराव बढ़ता है या अंतिम समय में कोई सहमति वाला चेहरा तलाशा जाता है, तो नाथवाणी “कंसेंसस कैंडिडेट” के रूप में उभर सकते हैं.

BJP संख्या में कमजोर, लेकिन रणनीति में आक्रामक

बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह एक सीट पर प्रत्याशी जरूर उतारेगी. पार्टी के पास फिलहाल 24 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 28 वोट चाहिए. इसके बावजूद बीजेपी को उम्मीद है कि गठबंधन में अगर नाराजगी या क्रॉस वोटिंग की स्थिति बनी तो मुकाबला रोचक हो सकता है. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा कर रहे हैं. बीजेपी की कोशिश सिर्फ सीट जीतने की नहीं, बल्कि यह संदेश देने की भी है कि वह विपक्ष की भूमिका में आक्रामक तरीके से मैदान में मौजूद है.

आखिर सबसे मजबूत दावेदार कौन?

मौजूदा राजनीतिक हालात को देखें तो JMM की ओर से अंजली सोरेन का नाम सबसे स्वाभाविक और मजबूत दिखाई देता है. वहीं कांग्रेस में राजेश ठाकुर और धीरज साहू के बीच असली मुकाबला माना जा रहा है. हालांकि झारखंड की राजनीति में आखिरी समय तक समीकरण बदलते रहे हैं. इसलिए राज्यसभा चुनाव की यह लड़ाई सिर्फ दो सीटों की नहीं, बल्कि गठबंधन के अंदर शक्ति संतुलन, भविष्य के नेतृत्व और 2029 की राजनीति की दिशा तय करने वाली लड़ाई भी मानी जा रही है.

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