हिमाचल में बारिश का कहर: 145 सड़कें बंद, 224 ट्रांसफार्मर ठप, मानसून में अब तक 142 मौतें
“हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. राज्य में 145 सड़कें बंद हैं, 224 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो चुके हैं और 14 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं.”

Himachal Rain Alert: हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर भारी तबाही लेकर आया है. पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. लगातार हो रही वर्षा और भूस्खलन के कारण सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) और मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों को बेहद संवेदनशील बताया है. प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने, नदी-नालों से दूरी बनाए रखने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह जारी की है.
भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई जिलों में रिकॉर्ड वर्षा
हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई तेज बारिश ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, धर्मशाला में सबसे अधिक 79 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि जोगिंदरनगर में 76 मिलीमीटर, मंडी में 63.4 मिलीमीटर और शिमला में 54.6 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई. लगातार बारिश के चलते कई क्षेत्रों में जलभराव, भूस्खलन और सड़क धंसने जैसी घटनाएं सामने आई हैं. पहाड़ी इलाकों में यातायात बाधित होने से लोगों को दैनिक कार्यों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है. मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
145 सड़कें बंद, मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित
लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेशभर में 145 सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक असर मंडी जिले में देखने को मिला है, जहां 66 सड़कें अवरुद्ध हैं. इसके अलावा कुल्लू में 31 और सिरमौर में 28 सड़कें बंद हैं. शिमला में 12, कांगड़ा में पांच, ऊना में दो और किन्नौर में एक सड़क भी प्रभावित हुई है. किन्नौर के चौरा-छोटा कंबा लिंक रोड के बंद होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा है. प्रशासन सड़कें खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बड़ी चुनौती बनी हुई है.
बिजली और पेयजल सेवाओं पर पड़ा गहरा असर
बारिश और भूस्खलन का असर केवल सड़क नेटवर्क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिजली और पेयजल आपूर्ति भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है. पूरे प्रदेश में 224 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (DTR) बंद हो चुके हैं. इनमें अकेले मंडी जिले के 182 ट्रांसफार्मर शामिल हैं, जबकि कुल्लू में 31, शिमला में सात और सोलन में तीन ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं. इसके कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है. वहीं, 14 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिनमें शिमला जिले की पांच योजनाएं सबसे अधिक प्रभावित बताई गई हैं. कई क्षेत्रों में लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. संबंधित विभाग बिजली और जलापूर्ति बहाल करने में जुटे हैं, लेकिन लगातार खराब मौसम और भूस्खलन के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहे हैं.
अगले 48 घंटे भारी, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य के कई हिस्सों के लिए अगले 48 घंटों को बेहद संवेदनशील बताया है. विभाग ने 10 और 11 अगस्त के लिए अलग-अलग जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है. अनुमान है कि कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जिससे भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क अवरोध जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है. साथ ही अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग व प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है. राहत और बचाव एजेंसियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.
मानसून में अब तक 142 मौतें, करोड़ों की संपत्ति को नुकसान
राज्य सरकार की संचयी मानसून क्षति रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से 6 अगस्त 2026 के बीच बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में 142 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 224 लोग घायल हुए हैं. इस अवधि में सरकारी और निजी संपत्तियों को मिलाकर लगभग 797.86 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है. सबसे अधिक क्षति लोक निर्माण विभाग (PWD) को हुई है, जबकि बिजली, जल शक्ति, शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग भी प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा निजी मकानों, कृषि भूमि और बागवानी क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है. प्रशासन लगातार नुकसान का आकलन कर रहा है और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के प्रयास जारी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में भी बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है.




