पुरी रथ यात्रा 2026: भारी बारिश के बीच उमड़ा लाखों भक्तों का सैलाब, भीड़ बढ़ने से कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ी
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा भक्ति और आस्था के माहौल में शुरू हो गई है. भारी बारिश के बावजूद लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. यात्रा के दौरान भीड़ बढ़ने से कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया.

Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा गुरुवार से भक्ति, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच शुरू हो गई. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचे हैं. भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ, हालांकि अत्यधिक भीड़ के कारण मंदिर के सिंहद्वार और बड़दांड क्षेत्र में कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई. कुछ श्रद्धालुओं को स्ट्रेचर और एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया. प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए हैं. धार्मिक अनुष्ठानों के बीच शुरू हुई यह यात्रा 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे के साथ संपन्न होगी और इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पुरी पहुंचेंगे.
भारी भीड़ और बारिश के बीच शुरू हुई रथ यात्रा
सुबह से ही पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी. लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी, लेकिन आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ. मंदिर परिसर और सिंहद्वार के आसपास भीड़ बढ़ने से कुछ श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई. स्वास्थ्यकर्मियों ने तत्काल राहत पहुंचाते हुए प्रभावित लोगों को स्ट्रेचर और एम्बुलेंस के जरिए चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया. प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल, मेडिकल टीम और स्वयंसेवकों की तैनाती की है.
पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद रथों पर विराजमान हुए भगवान
रथ यात्रा की शुरुआत पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ हुई. सबसे पहले 'पहांडी' अनुष्ठान के तहत भगवान बलभद्र, भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया गया. इसके बाद तीनों विग्रहों को उनके निर्धारित रथों पर विराजमान कराया गया. भगवान जगन्नाथ नंदीघोष, भगवान बलभद्र तालध्वज और देवी सुभद्रा दर्पदलन रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे. श्रद्धालु मोटी रस्सियों से इन रथों को खींचकर यात्रा में शामिल होते हैं, जिसे भगवान के प्रति सेवा और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु, भक्ति में डूबा पुरी
इस वर्ष भी रथ यात्रा में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं. धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच पूरा पुरी आध्यात्मिक वातावरण में डूबा नजर आया. कई प्रमुख हस्तियों ने भी रथ यात्रा में भाग लेकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए. श्रद्धालुओं का कहना है कि महाप्रभु के दर्शन और रथ यात्रा में शामिल होना जीवन का दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव है.
27 जुलाई तक चलेंगे धार्मिक आयोजन
रथ यात्रा केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला है. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर में कुछ दिनों तक विराजमान रहेंगे. इसके बाद निर्धारित परंपराओं के अनुसार उनकी वापसी यात्रा होगी और 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे अनुष्ठान के साथ इस वर्ष की रथ यात्रा का समापन होगा. इस पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की है.

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