Jharkhand News: सारंडा के विकास, DMFT फंड और रोजगार को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सारंडा दौरे के बाद प्रेस वार्ता में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, DMFT फंड के उपयोग, रोजगार, पलायन और खदानों की नीलामी को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.

रिपोर्ट : संजय मुंडा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र के दौरे के बाद राज्य सरकार की नीतियों पर कई सवाल उठाए. उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार, DMFT (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट) फंड के उपयोग, रोजगार के अवसरों की कमी और खदानों की नीलामी में देरी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. मरांडी का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध सारंडा क्षेत्र आज भी सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि खनिज संपदा से राज्य और उद्योगों को लाभ मिलता है, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका अपेक्षित फायदा नहीं मिल पा रहा. प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने रोजगार, पलायन और अवैध खनन जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की.
सारंडा के विकास को लेकर सरकार पर सवाल
प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सारंडा जैसे खनिज संपन्न क्षेत्र में आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क, स्वच्छ पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उन्होंने गांवों का दौरा कर स्थानीय लोगों से बातचीत की.
DMFT फंड के उपयोग पर उठाए गंभीर मुद्दे
मरांडी ने दावा किया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए उपलब्ध DMFT फंड का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया. उनका कहना था कि यदि इस राशि का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया जाता, तो क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलता. उन्होंने सरकार से इस फंड के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की.
रोजगार, पलायन और खदानों की नीलामी पर चिंता
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कई खदानों की लीज समाप्त होने के बाद समय पर नीलामी नहीं होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रभावित हुआ. उनका कहना था कि यदि खनन गतिविधियां समय पर शुरू होतीं तो हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता था.
अवैध खनन और निवेश को लेकर भी सरकार घिरी
मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में वैध खनन की प्रक्रिया धीमी है, जबकि अवैध खनन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निवेश और औद्योगिक विकास की बातें तो करती है, लेकिन उसका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता. उनके अनुसार खनन क्षेत्र में नीतिगत फैसलों में तेजी लाने की जरूरत है.
स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग
प्रेस वार्ता के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा का लाभ सबसे पहले राज्य के लोगों को मिलना चाहिए. उन्होंने सरकार से खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और शिक्षा, स्वास्थ्य व आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य क्षेत्र की समस्याओं को सामने लाकर समाधान की दिशा में पहल करना है.




