देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी, झारखंड में सिर्फ 3; बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर उठाए सवाल
“भाजपा नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार की खनन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी के मुकाबले राज्य में केवल तीन ब्लॉकों की नीलामी हुई. उन्होंने बंद खदानों, घटते रोजगार, कम खनन राजस्व और DMFT फंड में पारदर्शिता की कमी को लेकर सरकार से जवाब मांगा.”

Ranchi: भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की खनन नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि देश के करीब 40 प्रतिशत खनिज संसाधनों का मालिक होने के बावजूद झारखंड नई खदानों की नीलामी, खनिज उत्पादन, राजस्व और रोजगार सृजन में लगातार पिछड़ रहा है. मरांडी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा 2019-20 से अब तक देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई, लेकिन झारखंड में केवल तीन ब्लॉकों की नीलामी हुई. उन्होंने इसे नीतिगत विफलता, प्रशासनिक सुस्ती और पारदर्शिता की कमी का परिणाम बताते हुए सरकार से जवाब मांगा.
'खनिज संपदा के बावजूद विकास से पीछे रह गया झारखंड'
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड अपनी क्षमता के अनुरूप विकास नहीं कर पा रहा है. उनके मुताबिक राज्य में संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी सबसे बड़ी वजह है. उन्होंने कहा कि खदानों की समय पर नीलामी नहीं होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे रोजगार के अवसर भी घटे हैं. इसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. मरांडी ने कहा कि युवाओं को रोजगार नहीं मिलने के कारण पलायन बढ़ रहा है और खनन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां लगातार कमजोर होती जा रही हैं. सरकार को खनिज संपदा का बेहतर उपयोग कर रोजगार और राजस्व बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए.
सारंडा और जामदा का उदाहरण देकर सरकार को घेरा
चाईबासा के सारंडा क्षेत्र के हालिया दौरे का जिक्र करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कई खदानों की लीज समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण या पुनः नीलामी नहीं की गई, जिसके कारण वे वर्षों से बंद पड़ी हैं. उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा असर स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ा है. कभी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र रहा जामदा बाजार आज मंदी से जूझ रहा है. मजदूरों के साथ-साथ परिवहन, होटल, दुकान और छोटे कारोबार भी प्रभावित हुए हैं. उन्होंने कहा कि जामदा से महज 20 किलोमीटर दूर ओडिशा का बड़बिल क्षेत्र इसका उल्टा उदाहरण है, जहां समय पर खदानों की नीलामी और उत्पादन के कारण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है.
434 ब्लॉकों में झारखंड को मिले सिर्फ 3, ओडिशा सबसे आगे
मरांडी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2019-20 से अब तक देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई. इनमें ओडिशा में 45, छत्तीसगढ़ में 41, जबकि झारखंड में केवल तीन ब्लॉकों की नीलामी हुई. उन्होंने कहा कि छह वर्षों में इतनी कम नीलामी राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है. उन्होंने यह भी बताया कि 2018-19 से 2024-25 के बीच ओडिशा का लौह अयस्क उत्पादन 120 मिलियन टन से बढ़कर 180 मिलियन टन हो गया, जबकि झारखंड का उत्पादन लगभग 23 मिलियन टन पर ही स्थिर रहा. उनके अनुसार, यह अंतर संसाधनों का नहीं बल्कि बेहतर नीतियों और प्रभावी प्रशासन का परिणाम है.
ACC प्लांट बंद होने और DMFT फंड पर भी उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम के नोआमुंडी क्षेत्र में नौ में से सात पत्थर खदानें बंद हैं और झींकपानी में 1946 से संचालित ACC प्लांट 16 अगस्त से बंद होने जा रहा है. इससे करीब 1600 परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी. उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMFT) फंड के उपयोग में भी पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया. उनके अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम में 2016 से 2026 के बीच करीब 3,700 करोड़ रुपये जमा हुए, लेकिन न तो वार्षिक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही परियोजनाओं का पूरा विवरण उपलब्ध कराया गया. उन्होंने कहा कि वेबसाइट पर अंतिम अपडेट वर्ष 2018 का है, जिससे स्थानीय लोग अपने अधिकारों और योजनाओं की जानकारी से वंचित हैं.
सरकार से की ये मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार से बंद खदानों और पत्थर खदानों की जल्द नीलामी कराने, खनन गतिविधियों को दोबारा शुरू करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए समयबद्ध योजना बनाने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए और DMFT फंड के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए. मरांडी ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर सबसे पहला अधिकार राज्य की जनता का है. ऐसे में सरकार को यह जवाब देना होगा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद राज्य के लोग रोजगार, विकास और आर्थिक अवसरों से क्यों वंचित हैं.

